BNSS धारा 511: त्रुटि, चूक या अनियमितता के कारण प्रतिवर्ती होने पर निष्कर्ष या सजा
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 37: अनियमित कार्यवाही
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511. (1) इसमें पहले से निहित प्रावधानों के अधीन, सक्षम क्षेत्राधिकार वाले न्यायालय द्वारा पारित कोई भी निष्कर्ष, सजा या आदेश अपील न्यायालय द्वारा उलट या परिवर्तित नहीं किया जाएगा, किसी भी त्रुटि, चूक या अनियमितता के कारण पुनरीक्षण की पुष्टि की जाएगी। शिकायत, सम्मन, वारंट, उद्घोषणा, आदेश, निर्णय या परीक्षण से पहले या उसके दौरान या इस संहिता के तहत किसी भी जांच या अन्य कार्यवाही में, या अभियोजन के लिए किसी भी मंजूरी में कोई त्रुटि, या अनियमितता, जब तक कि उस न्यायालय की राय न हो, इससे वास्तव में न्याय की विफलता उत्पन्न हुई है।
(2) यह निर्धारित करने में कि क्या इस संहिता के तहत किसी कार्यवाही में कोई त्रुटि, चूक या अनियमितता, या अभियोजन के लिए किसी मंजूरी में कोई त्रुटि, या अनियमितता के कारण न्याय में विफलता हुई है, न्यायालय इस तथ्य को ध्यान में रखेगा कि क्या आपत्ति हो सकती है। और इसे कार्यवाही के पहले चरण में उठाया जाना चाहिए था।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 506. अनियमितताएं जो कार्यवाही को प्रभावित नहीं करतीं
- 507. अनियमितताएं जो कार्यवाही को प्रभावित करती हैं
- 508. गलत स्थान पर कार्यवाही
- 509. धारा 183 या धारा 316 के प्रावधानों का अनुपालन न करना
- 510. आरोप तय करने में चूक, या अनुपस्थिति, या त्रुटि का प्रभाव
- 512. दोष या त्रुटि के कारण अनुलग्नक गैरकानूनी नहीं होगा