BNSS धारा 302: कैदियों की उपस्थिति की आवश्यकता की शक्ति

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 24: जेलों में बंद या हिरासत में लिए गए व्यक्तियों की उपस्थिति

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302. (1) जब भी, इस संहिता के तहत किसी जांच, परीक्षण या कार्यवाही के दौरान, यह एक आपराधिक न्यायालय को दिखाई देता है,—
(ए) किसी जेल में बंद या हिरासत में लिए गए व्यक्ति को किसी अपराध के आरोप का जवाब देने के लिए, या उसके खिलाफ किसी कार्यवाही के उद्देश्य से न्यायालय के समक्ष लाया जाना चाहिए; या
(बी) कि न्याय के उद्देश्य से ऐसे व्यक्ति की गवाह के रूप में जांच करना आवश्यक है, न्यायालय एक आदेश दे सकता है जिसमें जेल के प्रभारी अधिकारी को ऐसे व्यक्ति को आरोप का जवाब देने या इस प्रयोजन के लिए न्यायालय के समक्ष पेश करने की आवश्यकता होगी। ऐसी कार्यवाही के लिए या साक्ष्य देने के लिए।
(2) जहां उप-धारा (1) के तहत कोई आदेश द्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा दिया जाता है, उसे जेल के प्रभारी अधिकारी को तब तक अग्रेषित नहीं किया जाएगा, या उस पर कार्रवाई नहीं की जाएगी जब तक कि वह मुख्य न्यायिक द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित न हो। मजिस्ट्रेट, जिसके अधीन ऐसा मजिस्ट्रेट होता है।
(3) उप-धारा (2) के तहत प्रतिहस्ताक्षर के लिए प्रस्तुत प्रत्येक आदेश के साथ तथ्यों का एक विवरण होगा, जो मजिस्ट्रेट की राय में, आदेश को आवश्यक बनाता है, और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिसे यह प्रस्तुत किया गया है, कर सकता है। ऐसे कथन पर विचार करने के बाद, आदेश पर प्रतिहस्ताक्षर करने से इनकार करें।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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