BNS धारा 208: लोक सेवक का आदेश न मानकर गैर-हाजिर रहना

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · अध्याय 13: लोक सेवकों के विधिपूर्ण प्राधिकार के अवमान के विषय में

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208. जो कोई किसी लोक सेवक द्वारा निकाले गए उस समन, सूचना, आदेश या उद्घोषणा के पालन में, जिसे ऐसे लोक सेवक के नाते निकालने के लिए वह वैध रूप से सक्षम हो, किसी निश्चित स्थान और समय पर स्वयं या अभिकर्ता द्वारा हाजिर होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उस स्थान या समय पर हाजिर होने का जानबूझकर लोप करता है, या उस स्थान से, जहां हाजिर होने के लिए वह आबद्ध है, उस समय से पूर्व चला जाता है, जिस समय चला जाना उसके लिए विधिपूर्ण होता,-

(क) वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ;

(ख) समन, सूचना, आदेश या उद्घोषणा किसी न्यायालय में स्वयं या किसी अभिकर्ता द्वारा हाजिर होने के लिए है, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

दृष्टान्त

(क) क उच्च न्यायालय द्वारा निकाले गए सपीना के पालन में उस न्यायालय के समक्ष उपसंजात होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उपसंजात होने में जानबूझकर लोप करता है । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।

(ख) क जिला न्यायाधीश द्वारा निकाले गए समन के पालन में उस जिला न्यायाधीश के समक्ष साक्षी के रूप में उपसंजात होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उपसंजात होने में जानबूझकर लोप करता है । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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