अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान

भगवद् गीता अध्याय 9, श्लोक 1

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संस्कृत श्लोक

( प्रभावसहित ज्ञान का विषय )

श्रीभगवानुवाच

इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे।

ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्‌॥

हिंदी अर्थ

श्री भगवान बोले- तुझ दोषदृष्टिरहित भक्त के लिए इस परम गोपनीय विज्ञान सहित ज्ञान को पुनः भली भाँति कहूँगा, जिसको जानकर तू दुःखरूप संसार से मुक्त हो जाएगा

सरल हिंदी व्याख्या

इस श्लोक में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि वह अब उन्हें सबसे गुप्त और महत्वपूर्ण ज्ञान बताएंगे। यह ज्ञान और विज्ञान का संगम है, जो न केवल ज्ञान को प्रकट करता है, बल्कि गहरी समझ और विवेक भी प्रदान करता है। इस ज्ञान को समझने और ग्रहण करने के बाद, अर्जुन संसार के बंधनों से मुक्त हो जाएगा और उसे मोक्ष प्राप्त होगा।

यह श्लोक बताता है कि भगवान अर्जुन को एक अत्यंत महत्वपूर्ण रहस्य बताने वाले हैं, जिसे जानकर वह पूरी तरह से आभासित होगा और उसकी आत्मा को सच्चे मोक्ष की प्राप्ति होगी। यह ज्ञान विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो ईर्ष्या या संदेह से मुक्त हैं, क्योंकि केवल एक साफ-सुथरी और निष्पक्ष मन ही इस गुप्त ज्ञान को पूरी तरह से ग्रहण कर सकता है।

भगवान श्री कृष्ण यहाँ यह स्पष्ट कर रहे हैं कि यह ज्ञान न केवल सामान्य ज्ञान है बल्कि इसे विज्ञान के साथ मिलाकर देखा जाना चाहिए, जिससे कि इसका प्रभाव और भी गहरा और परिपूर्ण हो। यह श्लोक आत्मज्ञान की ओर एक महत्वपूर्ण कदम को दर्शाता है, जो आत्मा की सच्ची स्वतंत्रता की ओर ले जाता है।