अध्याय 8: पाठ भाग 2

गर्भाषा में 10 महीने से पड़े हुए , उस की पीडाओं को देखते हुए, कृपालू भगवान् , उस को बाहिर निकाल कर , उस का जन्म करवाते हैं । सिर नीचे,ज़बरदस्ती बाहर निकाला हुआ ,पीडत ,अपनी समस्त यादों को खो कर, नये वातावरण को देख कर , शिशु के रूप में, घबरा कर रोता है।

बचपन के दुखों को झेलता हुआ , जवानी में अपनी इन्द्रीओं के वश,बुरी आदतों में फंसा , दुर्लभता से मिले मनुष्य जीवन को , युहीं बर्बाद करके, वृद्ध अवस्था में बीमारीओं से घिरा ,मृतु के पश्चात् फिर नरक लोक में जाता है । इस तरह बुरे कर्मों के जाल में फंसा , मेरी प्रकृति से , पापी कभी मुक्त नहीं होता.।

पाठ Banaka के हिंदी ऐप से लिया गया है। स्रोत और संस्करण।