अध्याय 9: पाठ भाग 1
पापों का विवरण , जो नरक में ले जाते हैं ।
जो बुरे कर्म करने से आनन्दित होते हैं ।
जो शुभ कर्म करते हैं ,वह यमराज के कक्ष में ,दक्षिण दुआर को छोड़ कर ,बाकी तीन दूआरों से प्रवेश करते हैं
वेतारनी नदी , दक्षिण दुआर से प्रवेश करने पर ही आती है।
ब्रह्मिनों के कातिल ,नशीले पदार्थों का सेवन ,अजन्में बच्चे को मारना, लोगों की हत्या , चोरी ,विश्वाश घात , अपनी ख़ुशी की चाहत, दूसरों से घृणा करना, अपने को बहुत अकल्मन्द समझना , और इन प्रकार के अनेक कर्मों दुआरा किये गए पाप कर्म।
जिन्हों ने गौ दान नहीं किया,दाह -संस्कार की रस्में नहीं करीं , झूटी गवाही, विद्वाहों के साथ शारीरक सम्बन्ध, स्त्री जो पति के साथ विश्वाश घात करती है ।
जानवरों को सताना, पेड़ों को काटना, सामाजिक रीतिओं का उल्लंघन ,ब्राह्मिन या कोई महिमान आपके घर में खाने की इच्छा से आये,उसे खाना नहीं दिया जाए ,जब की घर में खाना बन रहा हो ।
ऐसे प्रवृति के लोग , नरक की अनेक यातनाएं सहते हैं ।
यम राज के आदेश अनुसार, वह फिर पृथ्वी लोक में , नीच योनी में जनम ले कर , बीमारीओं के शिकार हो कर पीडत रहते हैं, और पाप कर्म करते रहते हैं। नरक के बार बार चक्कर काटते हैं।
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