अध्याय 8: पाठ भाग 1

पापी आत्माओं का दुखदाई जन्म ~ भगवान् विष्णु बताते हैं , किस तरह , स्त्री ,पुर्ष के मिलन से ,मनुष का जनम होता है।

पर्साब क 3 दिन के अंदर , पाप आत्मा का शरीर बनना शरू हो जाता है।

एक रात में मास का टुकड़ा , 5 रात में गोल , दसवें दिन वृक्ष के फल जैसा ।

एक महीने में - सिर ~ दुसरे महीने में - हाथ और दुसरे हिस्से , ~ तीसरे महीने में - बाल, नाख़ून, हड्डी ,लिंग ~ चोथे महीने - तल पदार्थ ~ पांच महीने - भूख , प्यास ~ छ: महीने - बच्चा दानी के बाई ओर चला जाता है।

जिस्म के बाकी हिस्सों का बनना , माता के खान पान पर निर्भर है।

अपनी पीठ और शरीर के बीच में सिर दबा होने से ,यह अपने हाथ , पैर , हिला नहीं सकता।

इस समय, आलोकिक शक्ति से , पिछले जन्मों में किये हुए कर्म याद आते हैं ।

7 वें महीने के आरम्भ से उसे चेतना आनि शुरू होती है और वह गर्भ शाळा में हिलना शुरू करता है। इश्वर से बिनती करता है , यदि मुझे यहाँ से बाहिर निकालो गे तो में सदा आप के चरणों में पड़ा रहूँगा । लेकिन यदि मेरे पाप कर्मों से मुझे सदा दुःख भोगने पड़ें गे , तो मैं कभी बाहिर नहीं आना चाहता।

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