अध्याय 7: पाठ भाग 4

पश्चिम दुआर :-

हीरे मोतिओं से सम्पन्न , सुगन्धित रास्ते पर , धार्मिक ग्रन्थों के कथित अनुसार कार्य करना , शिव और विष्णु भगवान् की पूजा करना , गायत्री मन्त्र का उच्चारण, दूसरों के धन की चाहत न करना , गृहस्त जीवन को कलंकित न करना, वचनों को निभाना, सब के सुख की चेष्टा करना , पूर्वजों के श्राद्ध करना, बुरी संगत से दूर रहना , वह अमृत को पीते हुए , सभा भवन में प्रवेश करते हैं ।

यमराज इन सभी को आते देख कर , अपने आसन से खड़े हो कर सब का अभिनन्दन करते हुए सब का स्वागत करते हुए कहते हैं, की आप सब नेक आत्माओं ने अपने सत्य कर्मों से यह देव लोक प्राप्त किया है ।

जिनको दुर्लभ मिलने वाला मनुष शरीर मिला , फिर भी सत्य कर्म नहीं किये, वह नर्क की भयानक आग में जलते रहें गे । अब आप सब आत्माएं ब्रह्म लोक को प्रस्थान कीजिए।

यमराज के मधुर वचन सुन कर, सब उनको नमस्कार कर, बाहिर पर्तीक्षा कर रहे अनेकों विमानों पर अपने कर्मों के अनुसार सवार हो कर ब्रह्मलोक को प्रस्थान करते हैं।

वहां कुछ युग , बिताने के बाद, स्वर्ग के भोग भोगते हुए, फिर से अच्छे परिवारों में जन्म लेते हैं। धन ,सम्पत्ति से युक्त , धार्मिक ग्रंथों के ज्ञाता , लोक कल्याण करते हुए ,अपने सत्य कर्मों के आधार पर ,आलोकिक सभा भवन में प्रवेश करते हैं।

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