धारा 17: राज्य आयुक्तों को हटाना
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 · हिंदी समेकित अध्ययन पाठ और सरल व्याख्या। स्वतंत्र शैक्षिक सामग्री, कानूनी सलाह या सरकारी सेवा नहीं।
इस धारा को समझें
यह धारा 14 की राज्य-स्तरीय समकक्ष व्यवस्था है, जिसमें राज्यपाल की निर्धारित भूमिका है। यह आयोग की संस्थागत व्यवस्था बताती है और धारा 19 के आवेदक के अपील उपचार का स्थान नहीं लेती।
Banaka की मूल व्याख्या · जाँच: 30 सितंबर 2026 · आधिकारिक हिंदी अनुवाद नहीं।
संबंधित मार्गदर्शक, उदाहरण और समझ जाँच →हिंदी अधिनियम पाठ
Banaka का संपादकीय समेकित अध्ययन पाठ · 18 नवंबर 2025 के अंग्रेज़ी संस्करण से मिलान। सरल व्याख्या ऊपर अलग दी गई है। मूल अंग्रेज़ी पाठ के लिए ‘Read in English’ खोलें।
17. राज्य आयुक्तों को हटाना.
(1) उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या किसी राज्य सूचना आयुक्त को राज्यपाल के आदेश द्वारा साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर उसके पद से तभी हटाया जाएगा, जब उच्चतम न्यायालय ने राज्यपाल द्वारा उसे किए गए किसी निर्देश पर जांच के पश्चात् यह रिपोर्ट दी हो कि, यथास्थिति, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त को उस आधार पर हटा दिया जाना चाहिए।
(2) राज्यपाल, उस राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त को, जिसके विरुद्ध उपधारा (1) के अधीन उच्चतम न्यायालय को निर्देश किया गया है, ऐसे निर्देश पर उच्चतम न्यायालय की रिपोर्ट की प्राप्ति पर राज्यपाल द्वारा आदेश पारित किए जाने तक, पद से निलंबित कर सकेगा और यदि आवश्यक समझे तो ऐसी जांच के दौरान कार्यालय में उपस्थित होने से प्रतिषिद्ध भी कर सकेगा।
(3) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी राज्यपाल, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या किसी राज्य सूचना आयुक्त को, आदेश द्वारा, पद से हटा सकेगा, यदि, यथास्थिति, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त-
(क) दिवालिया न्यायनिर्णीत किया गया है; या
(ख) वह ऐसे किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराया गया है, जिसमें राज्यपाल की राय में नैतिक अधमता अंतर्वलित है; या
(ग) वह अपनी पदावधि के दौरान अपने पद के कर्तव्यों से परे किसी वैतनिक नियोजन में लगा हुआ है; या
(घ) राज्यपाल की राय में, मानसिक या शारीरिक अक्षमता के कारण पद पर बने रहने के अयोग्य है ; या
(ङ) उसने ऐसे वित्तीय या अन्य हित अर्जित किए हैं, जिनमें, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त के रूप में उसके कृत्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है।
(4) यदि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या कोई राज्य सूचना आयुक्त, किसी प्रकार, राज्य सरकार द्वारा या उसकी ओर से की गई किसी संविदा या करार से संबद्ध या उसमें हितबद्ध है या किसी निगमित कंपनी के किसी सदस्य के रूप में से अन्यथा और उसके अन्य सदस्यों के साथ सामान्यतः उसके लाभ में या उससे प्रोद्भुत होने वाले किसी फायदे या परिलब्धियों में हिस्सा लेता है तो वह उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए कदाचार का दोषी समझा जाएगा।