दूर संचार अधिनियम 2023 · कतिपय उल्लंघनों का न्यायनिर्णयन

भाषा: English

धारा 31 · इस अध्याय में प्रयुक्त पदों की परिभाषाएं ।

धारा 31

31. इस अध्याय के प्रयोजन के लिए,—

(क) “न्यायनिर्णायक अधिकारी” से धारा 35 के अधीन नियुक्त कोई अधिकारी अभिप्रेत है ; और

(ख) “अभिहित अपील समिति” से धारा 36 के अधीन नियुक्त समिति अभिप्रेत है ।

हिंदी पाठ का सरकारी राजपत्र · 16 जून 2025; मुद्रित पृष्ठ 417–447 · स्रोत PDF पृष्ठ: 151

धारा 32 · प्राधिकार या समनुदेशन के निबंधन और शर्तों का भंग ।

धारा 32

32. (1) न्यायनिर्णायक अधिकारी, इस अधिनियम के अधीन स्वीकृत प्राधिकार या समनुदेशन के किसी निबंधन और शर्तों के भंग के मामले में, इस अध्याय के उपबंधों के अधीन जांच के अनुसरण में,—

(क) निम्नलिखित में से, एक या दोनों के संबंध में लिखित में कोई आदेश पारित करेगा, अर्थात् :—

(i) ऐसी प्राधिकृत इकाई को, या समनुदेशिती को, ऐसे उल्लंघन को रोकने या अनुपालन करने के लिए, किसी कार्य या चीज को करने या करने से रोकने के लिए निदेश देना ;

(ii) दूसरी अनुसूची में यथा विनिर्दिष्ट सिविल शास्तियां अधिरोपित करना ; और

(ख) केन्द्रीय सरकार के विचार के लिए प्राधिकार या समनुदेशन की अवधि के निलंबन, प्रतिसंहरण या कम करने के संबंध में सिफारिश करना ।

(2) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन न्यायनिर्णायक अधिकारी की सिफारिशों पर सम्यक्रूप से विचार करने के पश्चात्, प्राधिकार या समनुदेशन को, यथास्थिति, निलंबित, कम या प्रतिसंहृत कर सकेगी, जिसे, यदि सारवान् उल्लंघन का केंद्रीय सरकार के समाधानप्रद रूप से उपचार कर दिया जाता है, तो इसे उल्टा जा सकेगा ।

(3) इस धारा या धारा 33 के अधीन दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट शास्ति अधिरोपित करते समय, न्यायनिर्णायक अधिकारी को निम्नलिखित कारकों पर उचित ध्यान देना होगा, अर्थात् :—

(क) उल्लंघन के विस्तार को ध्यान में रखते हुए, उल्लंघन की प्रकृति, गंभीरता और अवधि ;

(ख) ऐसे उल्लंघन से प्रभावित व्यक्तियों की संख्या, और उनके द्वारा होने वाले नुकसान का स्तर ;

(ग) उल्लंघन का जानबूझकर या लापरवाही का प्रकार ;

(घ) उल्लंघन के दोहराव की प्रकृति ;

(ङ) उल्लंघन को शमन करने के लिए संबंधित व्यक्ति द्वारा की गई कार्रवाई, जिसमें धारा 34 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन स्वैच्छिक वचनबंध उपलब्ध करना भी सम्मिलित है ;

(च) केन्द्रीय सरकार को हुई राजस्व हानि ;

(छ) मामले की परिस्थितियों से संबंधित कोई भी उत्तेजक कारक, जैसे अनुपातहीन लाभ या अनुचित लाभ की रकम, जहां भी मात्रात्मक हो, उल्लंघन के परिणाम के रूप में हो ; और

(ज) मामले की परिस्थितियों से संबंधित सुसंगत कोई की शमन कारक, जैसे उल्लंघन के समय पर परिशोधन, या उल्लंघन के परिणामस्वरूप होने वाली हानि से बचने के लिए उठाए गए कदम ।

हिंदी पाठ का सरकारी राजपत्र · 16 जून 2025; मुद्रित पृष्ठ 417–447 · स्रोत PDF पृष्ठ: 151, 152

धारा 33 · अधिनियम का उल्लंघन ।

धारा 33

33. (1) न्यायनिर्णायक अधिकारी, तीसरी अनुसूची में यथा विनिर्दिष्ट, इस अधिनियम के उल्लंघन के संबंध में, ऐसे प्ररूप, रीति में और ऐसी फीस के साथ, जो विहित की जाए, प्राप्त किसी शिकायत की प्राप्ति पर, या स्वत:, इस अध्याय के उपबंधों के अधीन जांच करेगा, ऐसा उल्लंघन करने वाले व्यक्ति द्वारा संदेय, तीसरी अनुसूची में यथा विनिर्दिष्ट रकम तक के सिविल शास्ति को विनिर्दिष्ट करते हुए, लिखित रूप में आदेश पारित करेगा ।

(2) तीसरी अनुसूची के उपबंध, दुष्प्रेरण या ऐसे उल्लंघन कारित करने का प्रयास करने, या षड़यंत्र कारित करने, जैसा वे ऐसे उल्लंघन पर लागू होते हैं, लागू होगें ।

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धारा 34 · उल्लंघनों के लिए स्वैच्छिक वचनबंध ।

धारा 34

34. (1) धारा 32 के अधीन या तीसरी अनुसूची के क्रम संख्याक 4 के अधीन यथा उपबंधित उल्लंघन करने वाली कोई प्राधिकृत इकाई या समनुदेशिती, ऐसे उल्लंघन के अवधारण की प्रक्रिया की किसी सूचना या प्रारंभ से पूर्व, न्यायनिर्णायक अधिकारी को ऐसे उल्लंघन को प्रकट करते हुए और ऐसे उल्लंघन का शमन करने के लिए किए गए या किए जाने वाले उपायों का स्वैच्छिक वचनबंध प्रस्तुत करेगा ।

(2) उपधारा (6) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उपधारा (1) के अधीन दिए गए स्वैच्छिक वचनबंध की स्वीकृति से इस अध्याय के अधीन कार्यवाहियों का वर्जन करेगी ।

(3) जहां न्यायनिर्णायक अधिकारी को यह विश्वास करने का युक्तियुक्त आधार है कि धारा 32 या तीसरी अनुसूची के क्रम संख्यांक 4 के अधीन यथा उपबंधित उल्लंघन हुआ है, तो वह सुसंगत धारा के अधीन संबंधित प्राधिकृत इकाई या समनुदेशिती को नोटिस देगा ।

(4) प्राधिकृत इकाई या समनुदेशिती, उपधारा (3) के अधीन सुनवाई की प्रक्रिया के दौरान किसी भी समय, ऐसे उल्लंघन के संबंध में प्रस्तावित शमन उपायों को विनिर्दिष्ट करते हुए एक स्वैच्छिक वचनबंध प्रस्तुत कर सकेगा ।

(5) उपधारा (6) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उपधारा (4) के अधीन प्रस्तुत स्वैच्छिक वचनबंध की स्वीकृति का शमन उपाय के रूप में अर्थ लगाया जाएगा और धारा 32 की उपधारा (1) के खंड (क) या तीसरी अनुसूची के क्रम संख्याक 4 के अधीन सिविल शास्ति के अवधारण के प्रयोजन के लिए सम्यक्रूप से विचार किया जाएगा ।

(6) इस धारा की उपधारा (1) या उपधारा (4) के अधीन स्वैच्छिक वचनबंध, विनिर्दिष्ट समय के भीतर विनिर्दिष्ट कार्रवाई करने का वचनबंध ; विनिर्दिष्ट कार्रवाई को करने से विरत रहने का वचनबंध ; और स्वैच्छिक वचनबंध को प्रचारित करने का वचनबंध सम्मिलित हो सकेगा ।

(7) न्यायनिर्णायक अधिकारी, उपधारा (1) या उपधारा (4) के अधीन स्वैच्छिक वचनबंध को स्वीकार कर सकेगा या स्वैच्छिक वचनबंध प्रदान करने वाली प्राधिकृत इकाई या समनुदेशिती के करार के साथ, ऐसे स्वैच्छिक वचनबंध में सम्मिलित निबंधनों में परिवर्तन कर सकेगा ।

(8) जब स्वैच्छिक वचनबंध प्रदान करने वाली प्राधिकृत इकाई या समनुदेशिती, ऐसे वचनबंध की किन्हीं शर्तों का पालन करने में विफल रहता है, तो न्यायनिर्णायक अधिकारी, ऐसे प्राधिकृत इकाई या समनुदेशिती को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात्, दूसरी अनुसूची या तीसरी अनुसूची में यथा लागू, के अधीन विनिर्दिष्ट सिविल शास्ति का अधिरोपण कर सकेगा ।

हिंदी पाठ का सरकारी राजपत्र · 16 जून 2025; मुद्रित पृष्ठ 417–447 · स्रोत PDF पृष्ठ: 152, 153

धारा 35 · न्यायनिर्णायक अधिकारी ।

धारा 35

35. (1) केन्द्रीय सरकार, इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, केन्द्रीय सरकार के किसी भी अधिकारी को, जो संयुक्त सचिव के पद से नीचे का न हो, ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, जांच करने के लिए एक या अधिक न्यायनिर्णयन अधिकारियों के रूप में नियुक्त करेगी ।

(2) न्यायनिर्णायक अधिकारी, जांच करने के पश्चात्, धारा 32 या धारा 33 के उपबंधों के अनुसार ऐसा आदेश पारित कर सकेगा, जैसा वह उचित समझे ।

हिंदी पाठ का सरकारी राजपत्र · 16 जून 2025; मुद्रित पृष्ठ 417–447 · स्रोत PDF पृष्ठ: 153

धारा 36 · अभिहित अपील समिति ।

धारा 36

36. (1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, केन्द्रीय सरकार के अधिकारियों को, जो अपर सचिव के पद से नीचे का न हो, एक या अधिक अभिहित अपील समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त कर सकेगी, जिसको धारा 32 की उपधारा (1) या धारा 33 के अधीन न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा दिए गए किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति अपील कर सकेगा ।

(2) व्यथित व्यक्ति द्वारा, उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक अपील, न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा दिए गए आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से तीस दिनों के भीतर, ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में तथा ऐसी फीस के साथ, जो विहित की जाए, फाइल की जाएगी ।

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धारा 37 · न्यायनिर्णायक अधिकारी और अभिहित अपील समिति द्वारा अनुपालन की जाने वाली प्रक्रिया ।

धारा 37

37. (1) न्यायनिर्णायक अधिकारी और अभिहित अपील समिति की कार्यप्रणाली, जहां तक संभव हो, रूपरेखा के अनुसार डिजिटल होगी और वे डिजिटल कार्यालयों के रूप में कार्य करेंगे तथा ऐसे तकनीकी विधिक उपायों को, जो विहित किए जाएं, अभिनियोजित करेंगे, जो उसकी कार्यप्रणाली के लिए आनलाइन प्रक्रिया को सक्षम बनाएगी ।

(2) न्यायनिर्णायक अधिकारी और अभिहित अपील समिति की वही शक्तियां होंगी जो सिविल न्यायालय की होती है, और इसके समक्ष सभी कार्यवाहियां भारतीय दंड संहिता की धारा 193 और धारा 228 के अर्थान्तर्गत न्यायिक कार्यवाही समझी जाएंगी ।

हिंदी पाठ का सरकारी राजपत्र · 16 जून 2025; मुद्रित पृष्ठ 417–447 · स्रोत PDF पृष्ठ: 154

धारा 38 · प्रवर्तन ।

धारा 38

38. न्यायनिर्णायक अधिकारी या अभिहित अपील समिति, द्वारा दिया गया कोई आदेश उसी रीति मे निष्पादनीय होगा मानो वह सिविल न्यायालय की डिक्री हो ; और ऐसे आदेश को धारा 36 और धारा 39 में यथा उपबंधित ऐसे आदेशों के विरूद्ध अपील करने के लिए दी गई अवधि की समाप्ति पर इस धारा के अधीन अंतिम डिक्री माना जाएगा ।

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धारा 39 · धारा 32 से संबंधित मामलों पर अपील ।

धारा 39

39. कोई व्यक्ति, जो धारा 36 के अधीन अभिहित अपील समिति के आदेश से व्यथित है, जहां तक इसका संबंध धारा 32 की उपधारा (1) के अधीन मामलों से है, या धारा 32 की उपधारा (2) के अधीन केन्द्रीय सरकार के आदेश से है, इसकी अपील भारतीय दूर संचार विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 1997 की धारा 14 के अधीन गठित दूर संचार विवाद निपटान और अपीलीय प्राधिकरण में, उस तारीख से जिसको ऐसे प्राधिकृत इकाई या समनुदेशिती द्वारा आदेश की प्रति प्राप्त हुई है, से तीस दिन की अवधि के भीतर अपील की जा सकेगी ।

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धारा 40 · धारा 33 से संबंधित मामलों पर अपील ।

धारा 40

40. धारा 36 के अधीन अभिहित अपील समिति के आदेश द्वारा व्यथित कोई व्यक्ति, जहां तक इसका संबंध धारा 33 के अधीन मामलों से संबंधित है, की अपील मामले पर अधिकारिता रखने वाले सिविल न्यायालय में कर सकेगा ।

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धारा 41 · सिविल न्यायालय की अधिकारिता का वर्जन ।

धारा 41

41. किसी सिविल न्यायालय के पास किसी भी मामले के संबंध में अधिकारिता नहीं होगी, जिसे न्यायनिर्णायक अधिकारी, अभिहित अपील समिति, केन्द्रीय सरकार या दूर संचार विवाद निपटान और अपीलीय अधिकरण, इस अध्याय के अधीन अवधारित करने के लिए सशक्त है ।

हिंदी पाठ का सरकारी राजपत्र · 16 जून 2025; मुद्रित पृष्ठ 417–447 · स्रोत PDF पृष्ठ: 154