दूर संचार अधिनियम 2023 · दूर संचार नेटवर्क के लिए मार्ग का अधिकार

भाषा: English

धारा 10 · इस अध्याय में उपयोग किए गए पदों की परिभाषा ।

धारा 10

प्रवर्तन की अधिसूचित तारीखें

10. इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए,—

(क) “प्रसुविधा प्रदाता” से केन्द्रीय सरकार या कोई प्राधिकृत अस्तित्व अभिप्रेत है, जिसके अंतर्गत केन्द्रीय सरकार या प्राधिकृत निकाय के लिए कार्य करने वाला कोई ठेकेदार या उप-ठेकेदार या अभिकर्ता सम्मिलित है और इसके अंतर्गत उसके उत्तराधिकारी या समनुदेशिती सम्मिलित होंगे ;

(ख) “लोक अस्तित्व” से,—

(i) केन्द्रीय सरकार;

(ii) राज्य सरकार;

(iii) स्थानीय प्राधिकारी;

(iv) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या किसी कानून के अधीन निगमित या स्थापित कोई प्राधिकरण, निकाय, कंपनी या संस्था; या

(v) कोई गैर-सरकारी अस्तित्व जिसमें किसी लोक उपयोगिता या लोक उपयोगिताओं के वर्ग जैसा कि केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए, का स्वामित्व, नियंत्रण या प्रबंधन विहित किया गया है ;

(ग) “लोक संपत्ति” से कोई संपत्ति अभिप्रेत है चाहे जंगम हो या स्थावर, जिसके अंतर्गत कोई मशीनरी सम्मिलित है, जो किसी लोक उपयोगिता के स्वामित्व, कब्जे या नियंत्रण या प्रबंधन के अधीन हों ।

हिंदी पाठ का सरकारी राजपत्र · 16 जून 2025; मुद्रित पृष्ठ 417–447 · स्रोत PDF पृष्ठ: 142, 143

धारा 11 · लोक संपत्ति में दूर संचार नेटवर्क के लिए मार्ग का अधिकार ।

धारा 11

प्रवर्तन की अधिसूचित तारीखें

11. (1) कोई प्रसुविधा प्रदाता, किसी लोक अस्तित्व को जिसके स्वामित्व, नियंत्रण या प्रबंधन के अधीन कोई लोक संपत्ति निहित है, ऐसी लोक संपत्ति के नीचे, उस पर, उसके साथ, उसमें से, उसमें या उस पर दूर संचार नेटवर्क के लिए मार्ग के अधिकार की अनुज्ञा के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकेगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन किसी प्रसुविधा प्रदाता से किसी आवेदन की प्राप्ति पर लोक अस्तित्व उपधारा (4) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, निम्नलिखित सभी या किन्हीं कृत्यों के लिए अनुज्ञा अनुदत्त करेगा, अर्थात् :—

(क) दूर संचार नेटवर्क स्थापित करने की साध्यता का पता लगाने के प्रयोजन के लिए ऐसी संपत्ति के सर्वेक्षण ; या

(ख) किसी दूर संचार नेटवर्क को स्थापित करने, प्रचालन करने, अनुरक्षण करने, मरम्मत करने, प्रतिस्थापित करने, बढ़ाने, हटाने या किसी अन्य स्थान पर ले जाने के लिए समय-समय पर ऐसी संपत्ति में प्रवेश करने ।

(3) लोक अस्तित्व, उपधारा (2) के अधीन अनुज्ञा, शीघ्र रीति में और ऐसी समय- सीमा के भीतर, जो विहित की जाए, और ऐसे प्रशासनिक व्ययों तथा मार्ग के अधिकार के लिए प्रतिकर की शर्तें के अधीन रहते हुए, जो ऐसी रकम से अधिक नहीं होगा, जो विहित की जाए, प्रदान करेगा ।

(4) उपधारा (1) के अधीन किसी आवेदन की अस्वीकृति वित्तीय आधार, जिन्हें अभिलिखित किया जाएगा, के आधार पर होगी ।

(5) प्रसुविधा प्रदाता लोक संपत्ति को यथा संभव कम से कम नुकसान पहुंचाएगा और सुनिश्चित करेगा कि ऐसी लोक संपत्ति पर संक्रियाओं की कृत्यशीलता और सततः तब प्रतिकूल रूप से प्रभावित न हो जब कोई ऐसी संक्रिया की जाए जिसके लिए उपधारा (2) के अधीन अनुज्ञा अनुदत्त की गई है ।

(6) यदि संपत्ति को कोई नुकसान कारित किया जाता है तो प्रसुविधा प्रदाता लोक अस्तित्व के विकल्प पर या तो,—

(क) संपत्ति को उसी अवस्था में बहाल करेगा जिसमें वह ऐसी संक्रियाएं करने से पूर्व विद्यमान थी ; या

(ख) ऐसे नुकसान के लिए परस्पर सहमत प्रतिकर का संदाय करेगा ।

(7) इस धारा के उपबंध किसी लोक संपत्ति को, जो ऐसी परियोजनाओं या परियोजनाओं के वर्ग, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाएं, लागू होंगे, जिनकी बाबत उपधारा (1) के अधीन ऐसी परियोजनाओं के लिए छूट, संविदा या अनुज्ञा के लिए आवेदन किए जाएंगे ।

हिंदी पाठ का सरकारी राजपत्र · 16 जून 2025; मुद्रित पृष्ठ 417–447 · स्रोत PDF पृष्ठ: 143, 144

धारा 12 · ऐसी संपत्ति पर, जो धारा 11 के अधीन नहीं आती है, दूर संचार नेटवर्क के लिए मार्ग का अधिकार ।

धारा 12

प्रवर्तन की अधिसूचित तारीखें

12. (1) कोई प्रसुविधा प्रदाता उस व्यक्ति को, जिसमें धारा 11 के अधीन न आने वाली संपत्ति विहित है, के नीचे, उस पर, उसके साथ, उसमें से दूर संचार नेटवर्क के लिए मार्ग के अधिकार की ईप्सा करने के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकेगा ।

(2) प्रसुविधा प्रदाता से आवेदन की प्राप्ति पर, आवेदन प्राप्त करने वाला व्यक्ति परस्पर रूप से सहमत प्रतिफल को विनिर्दिष्ट करते हुए, निम्नलिखित के लिए करार कर सकेगा,—

(क) दूर संचार नेटवर्क स्थापित करने की साध्यता का पता लगाने के प्रयोजन के लिए सर्वेक्षण, जो अपेक्षित हो ; या

(ख) प्रसुविधा प्रदाता द्वारा किसी दूर संचार नेटवर्क को स्थापित करने, प्रचालन करने, अनुरक्षण करने, मरम्मत करने, प्रतिस्थापित करने, बढ़ाने, हटाने या किसी अन्य स्थान पर ले जाने के लिए समय-समय पर ऐसी संपत्ति में प्रवेश कर सकेगा ।

(3) प्रसुविधा प्रदाता कोई भी संक्रिया, जिसके लिए उपधारा (2) के अधीन अनुज्ञा अनुदत्त की गई है, करते समय संपत्ति को कम से कम संभव नुकसान पहुंचाएगा ।

(4) संपत्ति को कोई नुकसान होने की दशा में प्रसुविधा प्रदाता संपत्ति को उसी अवस्था में बहाल करेगा जिसमें वह ऐसी संक्रियाएं करने से पूर्व विद्यमान थी, ऐसा करने में असफल रहने पर उपधारा (2) के अधीन अनुज्ञा अनुदत्त करने वाला व्यक्ति, किसी ऐसे नुकसान के लिए, पारस्परिक रूप से सहमत प्रतिकर का हकदार होगा ।

(5) केन्द्रीय सरकार, नियमों द्वारा किसी प्रसुविधा प्रदाता द्वारा दूर संचार नेटवर्क के लिए प्रवेश, सर्वेक्षण, प्रचालन, अनुरक्षण, मरम्मत, प्रतिस्थापित क्रिया किसी दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया, जिसके अंतर्गत नोटिस की अवधि, नोटिस जारी करने की रीति, संपत्ति के स्वामी या अधिभोगी द्वारा आक्षेपों को शासित करने के लिए ढांचा, वह रीति जिसमें ऐसे आक्षेपों का समाधान किया जाएगा और नुकसान के लिए संदेय प्रतिकर से संबंधित विषय भी है, उपबंध कर सकेगी ।

(6) यदि कोई व्यक्ति, उपधारा (2) के अधीन अनुरोध किए गए मार्ग के अधिकार को प्रदान करने में असफल रहता है और केन्द्रीय सरकार अवधारित करती है कि ऐसा करना लोकहित में आवश्यक है तो वह स्वयं या इस प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा अभिहित किसी अन्य प्राधिकारी के माध्यम से अवधारित करेगी कि ऐसे प्रसुविधा प्रदाता को ऐसा दूर संचार नेटवर्क स्थापित करने, प्रचालित करने, अनुरक्षण करने के लिए ऐसे निबंधनों और शर्तों के अधीन रहते हुए, जिसके अंतर्गत मार्ग के अधिकारी के लिए प्रभार और संपत्ति को नुकसान के लिए प्रतिकर, यदि कोई हों, जिसका ऐसे व्यक्ति के द्वारा संदाय किया जाना है, जो विहित की जाए, मार्ग का अधिकारी अनुज्ञात किया जाएगा ।

हिंदी पाठ का सरकारी राजपत्र · 16 जून 2025; मुद्रित पृष्ठ 417–447 · स्रोत PDF पृष्ठ: 144, 145

धारा 13 · मार्ग के अधिकार का अविभेदकारी और गैर-अनन्य अनुदत्त किया जाना ।

धारा 13

प्रवर्तन की अधिसूचित तारीखें

13. धारा 11 या धारा 12 के अधीन मार्ग का अधिकार प्रदान करने वाला व्यक्ति यह सुनिश्चित करेगा कि प्रसुविधा प्रदाता को मार्ग का अधिकार अविभेदकारी रीति और जहां तक व्यवहार्य हों, गैर-अनन्य आधार पर अनुदत्त किया जाए ।

हिंदी पाठ का सरकारी राजपत्र · 16 जून 2025; मुद्रित पृष्ठ 417–447 · स्रोत PDF पृष्ठ: 145

धारा 14 · दूर संचार नेटवर्क का उस संपत्ति, जिस पर वह प्रतिस्थापित है, से सुभिन्न होना ।

धारा 14

प्रवर्तन की अधिसूचित तारीखें

14. (1) प्रसुविधा प्रदाता को उस संपत्ति पर, धारा 11 या धारा 12 में उपबंधित संपत्ति के उपयोग के अधिकार के सिवाय, कोई अधिकार, हक या हित नहीं होगा जिस पर दूर संचार नेटवर्क स्थापित है ।

(2) किसी संपत्ति पर प्रतिष्ठापित दूर संचार नेटवर्क, ऐसी संपत्ति पर किसी दावे, विल्लंगमों, परिसमापन या सदृश के अधीन नहीं होगा ।

(3) किसी संपत्ति पर प्रतिष्ठापित दूर संचार नेटवर्क को ऐसी संपत्ति का भाग नहीं समझा जाएगा जिसके अंतर्गत उस संपत्ति से संबंधित कोई संव्यवहार या संपत्ति कर, उद्ग्रहण, उपकर, फीस, शुल्क, जो उस संपत्ति को लागू हों, के प्रयोजन सम्मिलित है ।

(4) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी की अनुज्ञा के सिवाय किसी लोक अस्तित्व को किसी प्राधिकृत अस्तित्व द्वारा स्थापित किसी दूर संचार नेटवर्क को बंद करने, उस तक पहुंच रोकने या बलपूर्वक बंद करने के सिवाय तब जब ऐसी कार्रवाई किसी प्राकृतिक आपदा या सार्वजनिक आकस्मिकता के लिए आवश्यक हों, अधिकार नहीं होगा ।

हिंदी पाठ का सरकारी राजपत्र · 16 जून 2025; मुद्रित पृष्ठ 417–447 · स्रोत PDF पृष्ठ: 145

धारा 15 · केन्द्रीय सरकार की सामान्य डक्ट और केबल कोरीडोर स्थापित करने की शक्ति ।

धारा 15

प्रवर्तन की अधिसूचित तारीखें

15. (1) केन्द्रीय सरकार अवसंरचना परियोजनाओं या अवसंरचना परियोजनाओं के वर्ग को चाहे लोक अस्तित्व स्वयं विकसित किए जा रहे हों या किसी पब्लिक प्राईवेट भागीदारी या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा, जिनके लिए दूर संचार नेटवर्क प्रतिष्ठापित करने के लिए सामान्य डक्ट या कांडयूट या केबल कोरीडोरों की स्थापना की अपेक्षा हों, अधिसूचित कर सकेगी ।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट दूर संचार नेटवर्क, प्रसुविधा प्रदाताओं को ऐसे निबंधनों और शर्तों, जो विहित की जाए, जिसके अंतर्गत फीस और प्रभार है, के अधीन रहते हुए, खुली पहुंच के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा ।

हिंदी पाठ का सरकारी राजपत्र · 16 जून 2025; मुद्रित पृष्ठ 417–447 · स्रोत PDF पृष्ठ: 145

धारा 16 · दूर संचार नेटवर्क को हटाना, दूसरे स्थान पर ले जाया जाना या उसमें परिवर्तन करना ।

धारा 16

प्रवर्तन की अधिसूचित तारीखें

16. (1) जब धारा 11 या धारा 12 के अधीन किसी प्रसुविधा प्रदाता द्वारा किसी दूर संचार नेटवर्क को किसी संपत्ति के नीचे, ऊपर, के साथ, में या उस पर रखा गया है और ऐसा करने के लिए हकदार कोई व्यक्ति ऐसी संपत्ति से ऐसी रीति में व्यौहार करने की वांछा करता है, जिससे ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है कि दूर संचार नेटवर्क को उसके किसी अन्य भाग से हटा दिया जाना चाहिए या भाग पर ले जाया जाना चाहिए या किसी उच्चतर या निम्नतर स्तर पर ले जाया जाना चाहिए और उसके रूप में परिवर्तन किया जाना चाहिए तो वह प्रसुविधा प्रदाता से दूर संचार नेटवर्क को हटाने, किसी और स्थान पर ले जाने या परिवर्तन करने की अपेक्षा कर सकेगा ।

(2) यदि धारा 11 की उपधारा (6) के अधीन या धारा 12 की उपधारा (4) के अधीन प्रतिकर का संदाय किया गया है तो ऐसा व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन अध्यपेक्षा करते समय प्रसुविधा प्रदाता को हटाए जाने, किसी स्थान पर ले जाए जाने या परिवर्तन करने के अपेक्षित व्यय को ऐसे निबंधन पर, जो पारस्परिक रूप से सहमत हों, चुकाएगा ।

(3) यदि इस अध्याय के अधीन कोई विवाद उद्भूत होता है तो मामले का धारा 18 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्राधिकारी द्वारा अवधारण किया जाएगा ।

(4) यदि प्रसुविधा प्रदाता अध्यपेक्षा का अनुपालन नहीं करता है तो ऐसी अध्यपेक्षा करने वाला व्यक्ति जिला मजिस्ट्रेट, जिसकी अधिकारिता के भीतर संपत्ति अवस्थित है, को दूर संचार नेटवर्क को कहीं ओर ले जाए जाने या परिवर्तित करने का आदेश करने का आवेदन कर सकेगा ।

(5) आवेदन प्राप्त करने वाला जिला मजिस्ट्रेट अपने स्वविवेक पर और कारणों को लेखबद्ध करते हुए, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो वह उपयुक्त समझे, दूर संचार नेटवर्क के ऐसे किसी और स्थान पर ले जाए जाने या परिवर्तित करने जिसके अंतर्गत दूर संचार नेटवर्क का संपत्ति के किसी अन्य भाग पर ले जाया जाना या किसी उच्चतर या निम्नतर स्तर पर ले जाया जाना या उसके रूप में परिवर्तन करना सम्मिलित है ऐसे किसी और स्थान पर ले जाए जाने या परिवर्तन किए जाने का अनुमोदन या उसे अस्वीकार कर सकेगा और इस प्रकार किया गया आदेश अंतिम होगा ।

हिंदी पाठ का सरकारी राजपत्र · 16 जून 2025; मुद्रित पृष्ठ 417–447 · स्रोत PDF पृष्ठ: 145, 146

धारा 17 · सुविधा प्रदाता को सूचना ।

धारा 17

प्रवर्तन की अधिसूचित तारीखें

17. (1) कोई व्यक्ति, जो अपने किसी अधिकार का प्रयोग करने में अपनी संपत्ति को इस प्रकार बरतना चाहता है जिससे किसी दूर संचार नेटवर्क, जो इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन सम्यकत: स्थापित किया गया है, को नुकसान होने या दूर संचार सेवाओं में विध्न या हस्तक्षेप होने की संभाव्यता हो, तो ऐसे अधिकार के प्रयोग करने के अपने आशय की ऐसी अवधि और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, सुविधा प्रदाता को या केंद्रीय सरकार या ऐसे किसी प्राधिकारी को, जो केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए, पूर्व सूचना देगा ।

(2) सुविधा प्रदाता ऐसे दूर संचार नेटवर्क और रक्षोपाय, जो किए गए हों, ऐसी समय सीमा के भीतर, जो विहित की जाए, के ब्यौरों सहित ऐसी सूचना का प्रति उत्तर देगा ।

(3) जहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई व्यक्ति, जो अपने को या किसी अन्य व्यक्ति को शारीरिक क्षति के आसन्न खतरे से बचाने के सद्भावपूर्ण आशय से किसी संपत्ति से उस प्रकार बरतता है, जो उक्त धारा में निर्दिष्ट है, उसकी बाबत यह समझा जाएगा कि उसने उक्त धारा के उपबंधों का अनुपालन कर दिया है ।

(4) कोई व्यक्ति, जो उपधारा (1) के अनुबंधों की अनुपालना करने में विफल रहता है, जिससे किसी दूर संचार नेटवर्क को नुकसान होने या दूर संचार सेवाओं में विध्न या हस्तक्षेप होने की संभाव्यता हो तो जिला मजिस्ट्रेट सुविधा प्रदाता के आवेदन पर ऐसे व्यक्ति को आदेश दे सकेगा कि वह उस संपत्ति से उस प्रकार बरतने से उसके आदेश की तारीख से एक मास से अनधिक की कालावधि तक प्रविरत रहे और उस संपत्ति के बारे में तुरंत ऐसी कार्यवाही करे जो उस जिला मजिस्ट्रेट की राय में ऐसी कालावधि के दौरान ऐसे नुकसान, विघ्न या हस्तक्षेप का उपचार या निवारण करने के लिए आवश्यक हो ।

(5) यदि नुकसानों से संबंधित कोई विवाद उत्पन्न होता है तो यह विषय धारा 18 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्राधिकारी द्वारा अवधारित किया जाएगा ।

हिंदी पाठ का सरकारी राजपत्र · 16 जून 2025; मुद्रित पृष्ठ 417–447 · स्रोत PDF पृष्ठ: 146, 147

धारा 18 · इस अध्याय से संबंधित विवाद समाधान ।

धारा 18

प्रवर्तन की अधिसूचित तारीखें

18. (1) जिला मजिस्ट्रेट या केंद्रीय सरकार द्वारा यथा अधिसूचित कोई अन्य प्राधिकारी, जिसकी अधिकारिता के भीतर संपत्ति अवस्थित है, को इस धारा की उपधारा (2) के अधीन निर्दिष्ट विवादों के सिवाय, इस अध्याय के अधीन किन्हीं विवादों का समाधान करने की अनन्य शक्तियां होंगी ।

(2) यदि कोई विवाद धारा 11 की उपधारा (6) के अधीन प्रतिकर, धारा 12 की उपधारा (2) और उपधारा (4), धारा 17 की उपधारा (5) से संबंधित उत्पन्न होता है तो विवाद करने वाले किसी भी पक्षकार द्वारा उस जिला न्यायाधीश को, जिसकी अधिकारिता के भीतर संपत्ति अवस्थित है, आवेदन के प्रयोजन से किए गए आवेदन का उसके द्वारा अवधारण किया जाएगा ।

(3) इस धारा के अधीन किसी जिला मजिस्ट्रेट या जिला न्यायाधीश द्वारा किसी विवाद का प्रत्येक अवधारण अंतिम होगा ।

(4) उपधारा (3) की किसी बात का किसी सुविधा प्रदाता द्वारा संदत्त किसी प्रतिकर के संपूर्ण या किसी भाग को वाद द्वारा उस व्यक्ति से, जिसने उसे प्राप्त किया है, किसी व्यक्ति के वसूली के अधिकार को प्रभावित नहीं करेगी ।

हिंदी पाठ का सरकारी राजपत्र · 16 जून 2025; मुद्रित पृष्ठ 417–447 · स्रोत PDF पृष्ठ: 147