NI Act धारा 81: संदाय पर लिखत का परिदान या खो जाने की दशा में क्षतिपूर्ति

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 6: संदाय और ब्याज के विषय में

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81. संदाय पर लिखत का परिदान या खो जाने की दशा में क्षतिपूर्ति—[(1)] वचन-पत्र, विनिमय-पत्र या चेक पर शोध्य रकम संदत्त करने का दायी और उसके धारक द्वारा संदाय के लिए अपेक्षित किया गया कोई भी व्यक्ति संदाय से पूर्व इस बात का हकदार है कि वह उसे दिखाया जाए तथा संदाय कर दिए जाने पर इस बात का हकदार है कि वह उसे परिदत्त कर दिया जाए अथवा यदि लिखत खो गई है या पेश नहीं की जा सकती तो इस बात का हकदार है कि उस लिखत के आधार पर उसके विरुद्ध किसी आगे के दावे की बाबत उसका क्षतिपूरण किया जाए ।

[(2) जहां चेक, संक्षेपित चेक का कोई इलैक्ट्रानिक प्रतिरूप है, वहां संदाय के पश्चात् भी वह बैंककार जिसने संदाय प्राप्त किया है, संक्षेपित चेक को प्रतिधारित करने का हकदार होगा ।

(3) उस बैंककार द्वारा, जिसने लिखत का संदाय किया है, संक्षेपित चेक के इलैक्ट्रानिक प्रतिरूप के प्रिन्टआउट के पाद पर जारी प्रमाणपत्र, ऐसे संदाय का प्रथमदृष्ट्या सबूत होगा ।]

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आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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