NI Act धारा 80: जब कि कोई दर विनिर्दिष्ट नहीं है तब ब्याज

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 6: संदाय और ब्याज के विषय में

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80. जब कि कोई दर विनिर्दिष्ट नहीं है तब ब्याज—जब कि लिखत से ब्याज की कोई दर विनिर्दिष्ट नहीं है तब उस पर शोध्य रकम मद्दे ब्याज की गणना [लिखत के किन्हीं पक्षकारों के बीच ब्याज संबंधी किसी करार के होते हुए भी] उस तारीख से, जिसको भारित पक्षकार द्वारा उसका संदाय किया जाना चाहिए । उस तारीख तक जब उस पर शोध्य रकम निविदत्त या आप्त हो या ऐसी रकम के लिए वाद की संस्थिति के पश्चात् ऐसी तारीख तक, जैसी न्यायालय निर्दिष्ट करे, प्रतिवर्ष [अठारह प्रतिशत] की दर से की जाएगी ।

स्पष्टीकरण—जब कि भारित पक्षकार संदाय न करने से अनादृत किसी लिखत का पृष्ठांकक है तब वह ब्याज देने के लिए दायी केवल उसी समय से होगा जब कि उसे अनादर की सूचना प्राप्त होती है ।

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आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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