NI Act धारा 134: विदेशी लिखत के रचयिता, प्रतिगृहीता या पृष्ठांकक के दायित्व को शासित करने वाली विधि
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 16: अन्तरराष्ट्रीय विधि के विषय में
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¶134. विदेशी लिखत के रचयिता, प्रतिगृहीता या पृष्ठांकक के दायित्व को शासित करने वाली विधि—तत्प्रतिकूल संविदा न हो तो विदेशी वचन-पत्र, विनिमय-पत्र या चेक के रचयिता या लेखीवाल का दायित्व सब आवश्यक बातों में उस स्थान की विधि द्वारा विनियमित होता है जहां उसने वह लिखत रची थी तथा प्रतिगृहीता और पृष्ठांकक के अपने-अपने दायित्व उस स्थान की विधि से विनियमित होते हैं जहां लिखत देय की गई है ।
¶दृष्टांत
¶क द्वारा एक विनिमय-पत्र केलीफोर्निया में लिखा गया, जहां ब्याज की दर पच्चीस प्रतिशत है और वाशिंगटन में देय जहां ब्याज की दर छह प्रतिशत है, ख द्वारा प्रतिगृहीत किया गया । विनिमय-पत्र [भारत] में पृष्ठांकित किया गया है, और वह अनादृत हो गया । विनिमय-पत्र पर ख के विरुद्ध [भारत] में अनुयोजन लाया जाता है । वह केवल छह प्रतिशत की दर से ब्याज देने के दायित्व के अधीन है । किन्तु यदि क लेखीवाल के रूप में भारित किया जाता है तो वह पच्चीस प्रतिशत की दर से ब्याज देने के दायित्व के अधीन है ।
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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