NI Act धारा 133: प्रथम अर्जित मूल प्रति का धारक सबका हकदार होता है
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 15: जो विनिमय-पत्र संवर्ग में हैं उनके विषय में
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¶133. प्रथम अर्जित मूल प्रति का धारक सबका हकदार होता है—एक ही संवर्ग की विभिन्न मूल प्रतियों के सम्यक्-अनुक्रम- धारकों के बीच का जहां तक संबंध है उनमें से वह, जिसने अपनी मूल प्रति का हक सबसे पहले अर्जित किया, अन्य मूल प्रतियों का और विनिमय-पत्र के धन का हकदार होता है ।
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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