NI Act धारा 135: संदाय के स्थान की विधि अनादर को शासित करती है
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 16: अन्तरराष्ट्रीय विधि के विषय में
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¶135. संदाय के स्थान की विधि अनादर को शासित करती है—जहां कि वचन-पत्र, विनिमय-पत्र या चेक उस स्थान से भिन्न स्थान में देय किया गया है जिसमें वह रचित या पृष्ठांकित किया गया है वहां उस स्थान की विधि जहां वह देय किया गया है, अवधारित करती है कि अनादर किस बात से गठित होता है और अनादर की कैसी सूचना प्राप्त होती है ।
¶दृष्टांत
¶एक विनिमय-पत्र, जो [भारत] में लिखा और पृष्ठांकित किया गया किन्तु फ्रांस में देय के तौर पर प्रतिगृहीत किया गया था, अनादृत हो जाता है । पृष्ठांकिती ऐसे अनादर के लिए उसका प्रसाक्ष्य कराता है और फ्रांस की विधि के अनुसार उसकी सूचना दे देता है यद्यपि जो विनिमय-पत्र विदेशी नहीं हैं उनके बारे में एतस्मिन् अन्तर्विष्ट नियमों के अनुसार वह सूचना नहीं है । तथापि वह सूचना पर्याप्त है ।
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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