NI Act धारा 132: विनिमय-पत्रों का संवर्ग

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 15: जो विनिमय-पत्र संवर्ग में हैं उनके विषय में

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132. विनिमय-पत्रों का संवर्ग—विनिमय-पत्र ऐसी मूल प्रतियों में लिखे जा सकेंगे जिनमें से हर एक संख्यांकित हो और जो यह उपबंध अन्तर्विष्ट रखता हो कि वह केवल उसी समय तक देय बना रहेगा जब तक कि अन्य असंदत्त रहते हैं । सब मूल प्रतियां मिलकर एक संवर्ग गठित करती हैं, किन्तु पूरे संवर्ग से केवल एक विनिमय-पत्र गठित होता है और वह तब निर्वापित हो जाता है जब उन प्रतियों में से कोई यदि एक पृथक् विनिमय-पत्र होता तो निर्वापित हो जाता ।

अपवाद—जब कि कोई व्यक्ति विनिमय-पत्र की विभिन्न मूल प्रतियों को विभिन्न व्यक्तियों के पक्ष में प्रतिगृहीत करता या पृष्ठांकित करता है और तब वह और हर एक मूल प्रति का पश्चात्वर्ती पृष्ठांकक ऐसी मूल प्रति पर ऐसे दायी होते हैं मानो वह पृथक् विनिमय-पत्र हों ।

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आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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