NI Act धारा 104A: टिप्पण कब प्रसाक्ष्य के समतुल्य होता है
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 9: टिप्पण और प्रसाक्ष्य के संबंध में
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¶[104क. टिप्पण कब प्रसाक्ष्य के समतुल्य होता है—इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए जहां कि विनिमय-पत्र या वचन-पत्र के लिए यह अपेक्षित है कि वह एक विनिर्दिष्ट समय के अन्दर या आगे कोई और कार्यवाही की जाने से पूर्व प्रसाक्ष्यित कराया जाए वहां यह पर्याप्त है कि वह विनिमय-पत्र विनिर्दिष्ट समय के अवसान से पूर्व या कार्यवाही करने के पूर्व प्रसाक्ष्य के लिए टिप्पणित कर दिया जाए और तत्पश्चात् किसी भी समय प्ररूपित प्रसाक्ष्य टिप्पण की तारीख को किए गए के तौर पर पूरा किया जा सकेगा ।]
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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