NI Act धारा 100: प्रसाक्ष्य

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 9: टिप्पण और प्रसाक्ष्य के संबंध में

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100. प्रसाक्ष्य—जब कि वचन-पत्र या विनिमय-पत्र अप्रतिग्रहण या असंदाय द्वारा अनादृत हो गया है तब धारक ऐसे अनादर को नोटरी पब्लिक द्वारा युक्तियुक्त समय के भीतर टिप्पणित और प्रमाणित करा सकेगा । ऐसा प्रमाण प्रसाक्ष्य कहलाता है ।

बेहतर प्रतिभूति के लिए प्रसाक्ष्य—जब कि विनिमय-पत्र का प्रतिगृहीता दिवालिया हो गया है या विनिमय-पत्र की परिपक्वता से पूर्व उसका प्रत्यय खुले आम अधिक्षेपित किया गया है तब धारक प्रतिगृहीता से बेहतर प्रतिभूति की मांग नोटरी पब्लिक से युक्तियुक्त समय के अन्दर करवा सकेगा और प्रतिभूति दिए जाने से इंकार किए जाने पर ऐसे तथ्यों को युक्तियुक्त समय के भीतर पूर्वोक्त जैसे टिप्पणित और प्रमाणित करवा सकेगा । ऐसा प्रमाण बेहतर प्रतिभूति के लिए प्रसाक्ष्य कहलाता है ।

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आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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