BNSS धारा 525: ऐसे मामले जिनमें न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट व्यक्तिगत रूप से रुचि रखते हैं

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 39: विविध

अन्य भाषाओं में भी: English

525. कोई भी न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट, उस न्यायालय की अनुमति के बिना, जिसमें उसके न्यायालय से अपील की गई है, किसी भी मामले की सुनवाई नहीं करेगा या सुनवाई के लिए प्रतिबद्ध नहीं करेगा, जिसमें वह एक पार्टी है, या व्यक्तिगत रूप से रुचि रखता है, और कोई भी न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट ऐसा नहीं करेगा। स्वयं द्वारा पारित या किए गए किसी भी निर्णय या आदेश के खिलाफ अपील सुनें।
स्पष्टीकरण.—किसी न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट को केवल इस कारण से किसी मामले में पक्षकार या उसमें व्यक्तिगत रूप से रुचि रखने वाला नहीं माना जाएगा कि वह उसमें सार्वजनिक रूप से शामिल है, या केवल इस कारण से कि उसने उस स्थान को देखा है जिसमें किसी अपराध को करने का आरोप लगाया गया है, या किसी अन्य स्थान पर जहां मामले से संबंधित कोई अन्य लेनदेन सामग्री होने का आरोप लगाया गया है, और मामले के संबंध में पूछताछ की गई है।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

इस अध्याय की अन्य धाराएँ