BNSS धारा 525: ऐसे मामले जिनमें न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट व्यक्तिगत रूप से रुचि रखते हैं
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 39: विविध
अन्य भाषाओं में भी: English
525. कोई भी न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट, उस न्यायालय की अनुमति के बिना, जिसमें उसके न्यायालय से अपील की गई है, किसी भी मामले की सुनवाई नहीं करेगा या सुनवाई के लिए प्रतिबद्ध नहीं करेगा, जिसमें वह एक पार्टी है, या व्यक्तिगत रूप से रुचि रखता है, और कोई भी न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट ऐसा नहीं करेगा। स्वयं द्वारा पारित या किए गए किसी भी निर्णय या आदेश के खिलाफ अपील सुनें।
स्पष्टीकरण.—किसी न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट को केवल इस कारण से किसी मामले में पक्षकार या उसमें व्यक्तिगत रूप से रुचि रखने वाला नहीं माना जाएगा कि वह उसमें सार्वजनिक रूप से शामिल है, या केवल इस कारण से कि उसने उस स्थान को देखा है जिसमें किसी अपराध को करने का आरोप लगाया गया है, या किसी अन्य स्थान पर जहां मामले से संबंधित कोई अन्य लेनदेन सामग्री होने का आरोप लगाया गया है, और मामले के संबंध में पूछताछ की गई है।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 520. उच्च न्यायालयों के समक्ष परीक्षण
- 521. कोर्ट-मार्शल द्वारा मुकदमा चलाए जाने के लिए उत्तरदायी व्यक्तियों को कमांडिंग अधिकारियों को सौंपना
- 522. फॉर्म
- 523. नियम बनाने की उच्च न्यायालय की शक्ति
- 524. कुछ मामलों में कार्यकारी मजिस्ट्रेट को आवंटित कार्यों को बदलने की शक्ति
- 526. प्रैक्टिसिंग वकील को कुछ न्यायालयों में मजिस्ट्रेट के रूप में नहीं बैठना
- 527. बिक्री से संबंधित लोक सेवक संपत्ति की खरीद या बोली नहीं लगाएगा
- 528. उच्च न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियों की बचत
- 529. न्यायालयों पर निरंतर अधीक्षण करने का उच्च न्यायालय का कर्तव्य
- 530. परीक्षण और कार्यवाही इलेक्ट्रॉनिक मोड में आयोजित की जाएगी
- 531. निरसन और बचत