BNSS धारा 521: कोर्ट-मार्शल द्वारा मुकदमा चलाए जाने के लिए उत्तरदायी व्यक्तियों को कमांडिंग अधिकारियों को सौंपना

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 39: विविध

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521. (1) केंद्र सरकार इस संहिता और वायु सेना अधिनियम, 1950, सेना अधिनियम, 1950, नौसेना अधिनियम, 1957 और संघ के सशस्त्र बलों से संबंधित किसी भी अन्य कानून के अनुरूप नियम बना सकती है। उस समय लागू होने पर, ऐसे मामलों में जिनमें सेना, नौसेना या वायु सेना कानून, या ऐसे अन्य कानून के अधीन व्यक्तियों पर उस न्यायालय द्वारा मुकदमा चलाया जाएगा जिस पर यह संहिता लागू होती है, या कोर्ट-मार्शल द्वारा; और जब किसी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने लाया जाता है और उस पर ऐसे अपराध का आरोप लगाया जाता है जिसके लिए उस पर या तो उस न्यायालय द्वारा मुकदमा चलाया जा सकता है जिस पर यह संहिता लागू होती है या कोर्ट-मार्शल द्वारा, तो ऐसे मजिस्ट्रेट को ऐसे नियमों का ध्यान रखना होगा, और उचित मामले उसे, उस अपराध के बयान के साथ, जिसके लिए वह आरोपी है, उस इकाई के कमांडिंग ऑफिसर को, जिससे वह संबंधित है, या निकटतम सेना, नौसेना या वायु सेना स्टेशन के कमांडिंग ऑफिसर को सौंपता है, जैसा भी मामला हो। हो सकता है, कोर्ट-मार्शल द्वारा मुकदमा चलाने के उद्देश्य से।
स्पष्टीकरण.—इस अनुभाग में—
(ए) "इकाई" इसमें एक रेजिमेंट, कोर, जहाज, टुकड़ी, समूह, बटालियन या कंपनी शामिल है;
(बी) "कोर्ट-मार्शल" इसमें संघ के सशस्त्र बलों पर लागू प्रासंगिक कानून के तहत गठित कोर्ट-मार्शल के समान शक्तियों वाला कोई भी न्यायाधिकरण शामिल है।
(2) प्रत्येक मजिस्ट्रेट, ऐसे किसी भी स्थान पर तैनात या नियोजित सैनिकों, नाविकों या वायुसैनिकों की किसी इकाई या निकाय के कमांडिंग ऑफिसर द्वारा उस उद्देश्य के लिए एक लिखित आवेदन प्राप्त करने पर, किसी भी आरोपी व्यक्ति को पकड़ने और सुरक्षित करने के लिए अपने अधिकतम प्रयास करेगा। ऐसा अपराध.
(3) एक उच्च न्यायालय, यदि वह उचित समझे, निर्देश दे सकता है कि राज्य के भीतर किसी भी जेल में बंद कैदी को सुनवाई के लिए कोर्ट-मार्शल के समक्ष लाया जाए या कोर्ट-मार्शल के समक्ष लंबित किसी मामले से संबंधित जांच की जाए।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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