BNSS धारा 235: समय, स्थान और व्यक्ति का विवरण
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 18: शुल्क
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235. (1) आरोप में कथित अपराध का समय और स्थान, और वह व्यक्ति (यदि कोई हो) जिसके विरुद्ध, या वह चीज़ (यदि कोई हो) जिसके संबंध में यह किया गया था, जैसे विवरण शामिल होंगे, जैसे कि अभियुक्त को उस मामले की सूचना देने के लिए उचित रूप से पर्याप्त है जिसके लिए उस पर आरोप लगाया गया है।
(2) जब आरोपी पर आपराधिक विश्वासघात या धन या अन्य चल संपत्ति के बेईमानी से दुरुपयोग का आरोप लगाया जाता है, तो सकल राशि निर्दिष्ट करना या, जैसा भी मामला हो, उस चल संपत्ति का वर्णन करना पर्याप्त होगा जिसके संबंध में अपराध किया गया है। कथित तौर पर अपराध किया गया है, और जिन तारीखों के बीच अपराध किए जाने का आरोप लगाया गया है, विशेष वस्तुओं या सटीक तारीखों को निर्दिष्ट किए बिना, और इस प्रकार लगाए गए आरोप को धारा 242 के अर्थ के भीतर एक अपराध का आरोप माना जाएगा। :
बशर्ते कि ऐसी पहली और आखिरी तारीखों के बीच का समय एक वर्ष से अधिक नहीं होगा।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 234. आरोप की सामग्री
- 236. अपराध करने का तरीका कब बताया जाना चाहिए
- 237. प्रभारी के शब्द उस कानून के अर्थ में लिए गए हैं जिसके तहत अपराध दंडनीय है
- 238. त्रुटियों का प्रभाव
- 239. न्यायालय आरोप में परिवर्तन कर सकता है
- 240. आरोप बदलने पर गवाहों को वापस बुलाना
- 241. अलग-अलग अपराधों के लिए अलग-अलग आरोप
- 242. वर्ष के भीतर एक ही प्रकार के अपराधों पर एक साथ आरोप लगाया जा सकता है
- 243. एक से अधिक अपराध के लिए मुकदमा
- 244. जहां यह संदिग्ध है कि कौन सा अपराध किया गया है
- 245. जब अपराध साबित हो जाए तो उसे आरोपित अपराध में शामिल कर लिया जाए
- 246. किन व्यक्तियों पर संयुक्त रूप से आरोप लगाया जा सकता है
- 247. कई आरोपों में से एक पर दोषसिद्धि पर शेष आरोपों को वापस लेना