अध्याय 7: पाठ भाग 1
यमराज की राजधानी का वर्णन : ~ 44 योजन , बहोभिती शहर से दूर ,यमराज की महान नगरी पड़ती है।
सभी आत्माएं धर्म -दरवाज़े पर खड़े पहरेदार को अपनी आगमन सूचना देत्ती हैं।
चित्रगुप्त अपने चमचमाते आसन पर बिराजमान होते हैं । सब कुछ मालूम होते हुए भी , वह सरावंस ( यह ब्राह्म पुत्र हैं जो पूरे विश्व में चक्कर लगाते रहते हैं और दूर से ही ,मनुष्य चाहे किसी भी संसार में हो ,उस के सारे कर्मों का व्यौरा / सूची तयार करते रहते हैं । इन की पत्त्निया ,स्राविनिस ,मनुष्य की इच्छाओं और कल्पनाओं की सूची तयार करती हैं । इस तरह मनुष के सब अच्छे , बुरे कर्मों की सूची तयार होती है। और यह जानकारी चित्रगुप्त के पास जाती है।
टिप्पणी : ~ प्राचीन काल में ,बायो - चिप का ज्ञान न होने के कारण , ऐसा उल्लेख करके , मनुष्य को एक भ्रम में रखा गया है। अब हम यह कह सकते हैं की बायो -चिप , सूक्ष्म आत्मा के साथ ,जुडी रहती है और जिस में से पूरी जानकारी लेने के लिए केवल यमराज ही सक्षम हैं। उस जानकारी के आधार पर पुनर्जन्म होता है।
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