अध्याय 7: पाठ भाग 2
जिन आत्माओं के अच्छे कर्म होते हैं , उन्हें स्वर्ग की ओर भेजा जाता है।
चित्र गुप्त दुआरा सूचित की हुई , पाप आत्माओं को , यमराज अपना भयानक रूप ,बहुत बड़े भेंसे पर विराजमान, 32 हाथों में, जो कि 3 ,3 जोजन लम्बे हैं , उन में हथ्हिआर धारण किये हुए, और कुओं की भांति लाल आँखें , एक लम्बा नाक , दर्शाते हुए, अपने दूतों को उन्हें नर्क में ले जाने को कहते हैं । 21 महान भ्यानिक नरकों में उनको यातनाएं दी जाती हैं। इस तरह अनेक यातनाएं सहन कर मनुष,शुद्ध आत्मा के साथ फिर दूसरा जनम लेता है।
इस नगरी के बीचों बीच , यमराज का चम् चमाता भव्य भवन स्थित है। यह 200 योजन लम्बा और 50 योजन ऊँचा है । इस के अंदर अलौकिक सभा कक्ष है । वहां पर उपस्थित सभी अपनी ही रौशनी से जग मगाते हैं । इस भवन में पहुँचने के लिए चार दुआर हैं।
भव्य आसन के ऊपर ,छत्र के नीचे ,एक बड़े ताज से सुशोभित , यम राज विराजमान होते हैं।
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