अध्याय 6: पाठ भाग 4

आप इस दार्शनिक विचार को कैसे लेते हैं, आप पर निर्भर करता है ।

मृतिक शरीर छोड़ने के १७ दिन बाद, 18 वें दिन प्रेत-शरीर पहली नगरी में विश्राम के लिए रुकता है और पुत्र दुआरा दिया हुआ भोजन ग्रहण करता है । इस तरह सब नगरिओं को पर करता हुआ ,एक वर्ष के अंत में बाहुभ्हेतपुर नगरी पहुँच कर प्रेत-शरीर अपने शरीर को छोड़ कर,अंगूठे के नाप का शरीर धारण कर लेता है

प्रेत-आत्मा अपने कर्मों का भोग भोगने, यम दूतों के साथ, पाश्बुन्धों में जकड़ा ,हवा में चल पड़ता है ।

यम राज की नगरी में चार दुआर बने हुए हैं । इन में से पाप कर्मी दक्षिण दुआर से यम राज की राजधानी की ओर प्रस्थान करते हैं ।

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