अध्याय 6: पाठ भाग 2
मृतु उपरांत बायो -आत्मा , मृतक शरीर में प्रवेश करने की कोशिश करती है । परन्तु यह प्रेत -आत्मा , मृतक शरीर , उसकी अस्थिओं के पास वायु में दुखी रूप में मंडराती रहती है । प्रेत -आत्मा मृत स्थान पर तब तक रहती है जब तक यह प्रेत आत्मा से बायो -आत्मा में नहीं बदल जाती । यह बायो-आत्मा ही यमराज के पास जाने में सक्षम होती है।इस प्रेत-आत्मा को बायो आत्मा में परीवर्तन करने के लिए पिंड दान की आवशकता होती है। पिंड दान पुत्र,रिश्तेदार, या किसी और दुआरा भी सम्पन्न कराया जा सकता है।
यह दस दिन की रस्म है। पिंड को ४ भागों में बांटा जाता है । दो भाग पांच भूतों ( पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश ), एक भाग यमदूतों और एक भाग प्रेत-आत्मा के लिए अर्पण किया जाता है । 9 दिन तक यह भोज खाने के बाद प्रेत- आत्मा , प्रेत-शरीर में, जिस का नाप मनुष शरीर के हाथ जितना होता है , बदल जाती है और दसवें दिन इस को शक्ति मिलती है । इस शक्ति के साथ यह यमराज तक के रास्ते पर चलने को तैयार हो जाती है। इस रास्ते को मृतु-सडक भी कहा जाता है ।
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