अध्याय 6: पाठ भाग 1

पिंड दान का महत्व :- ~ मृतक शरीर की आत्मा अपने साथ कर्मों का लेखा जोखा ,दूसरे लोक या अगले जीवन के लिए नहीं ले जाती.। आत्मा अपने साथ ,अपने कर्मों का व्योरा जो की एक चिप ( कार्बोन के कण पर अंकित होता है , और जिसे चित्र गुप्त भी कहा जाता है । चित्र का अर्थ - तस्वीर और गुप्त का अर्थ -जिस का भेद न मालूम हो यह एक आलोकिक क्रिया है ) और जो की वायु दुआरा साथ जाता है ,और जिसे बायो -चिप बोलते हैं ,मृतु के बाद , आत्मा के साथ चिपका रहता है। यह बायो -आत्मा, साधारण आँखों से दिखाई नहीं देती और यह अंगूठे जितनी बड़ी होती है परन्तु इस की मोटाई नहीं दिख सकती । पूरे जीवन का व्योरा , कार्बोन,वायु या हाड्रोजन के कण पर,प्राणी जो कुछ भी देखता, सुनता ,बोलता और सोचता है,अंकित हो जाता है। इस में अंकित सारी सूची,यह चिप यमराज को देता है । केवल यमराज ही इस को पढ़ सकता और नष्ट कर सकता है। उसे नष्ट करने के बाद ही , यमराज प्राणी के कर्मों अनुसार उसे दंडित करते है । जब तक बायो चिप आत्मा के साथ रहता है, बायो -आत्मा दूसरा शरीर धारण नहीं कर सकती । जब यह चिप बायो -आत्मा से अलग किया जाता है , तब शुद्ध आत्मा अपने कर्मों अनुसार ,दुःख या सुख का भोग करके , नया शरीर धारण करती है।

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