अध्याय 5: पाठ भाग 2

अपने पितरों की ख़ुशी के लिए, एक गौ का दान करे ।

ब्रह्मिन के पैर धो कर , दूध, मिठाई और भोजन खिलाये ।

बिस्तर पर एक सोने की मूर्ती रख कर ,उस की पूजा करके,बिस्तर का दान करे ।

11 वें दिन एक सांड , जिस का पूरा शरीर काले-भूरे रंग का हो,पित्र्रों की ख़ुशी के लिए दान करना चाहिए । अपने से दान किये हुए सांड से ,बचपन ,जवानी,वृद्ध अवस्था में किये हुए सब पाप नष्ट हो जाते हैं.।

सांड का दान करने पश्चात 16 श्राद्ध ( 10 पिंड और 6 पहले बताए हुए ) पूरण करें / पहले 16 श्राद्ध अपवित्र माने जाते हैं । इस के बाद दुसरे मध्य 16 पवित्र माने जाते हैं ।

पहला "लाइ" का दाना ,विष्णु जी को , "2" सरा - रूद्र देव "3" - यम देव "4" - महाराज सोम "5" - देवी देवता "6" - पितरों "7" - मृतु "8" - रूद्र देव "9" - पूरुसा "10" - देव्न्ग्त "11" - विष्णु "12" - ब्रह्मा "13" - विष्णु "14" - रूद्र "15" - यम देव "16" - पूरुसा

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