अध्याय 4: पाठ भाग 1

10 दिनों की रस्में - पूर्ति। यदि पुत्तर न हो तो , कौन कर सकता है ?

आंसू न बहाते हुए, ( क्योंकि पृथक आत्मा को वह सब कडवे आंसू , जो परिजनों की आँखों से गिरते हैं , पीने पड़ते हैं), पुत्र को अपने पिता के प्रति" लाइ" की फुल्लियन अर्पण करनी चाहिए ।

जो जन्म लेता है, वह मरता भी अवश्य है / यदि किसी के पुत्र नहीं है तो , धर्म -पत्नी , भाई, रिश्तेदार या ब्राह्मिन , रस्मों को पूरी कर सकता है। मनु ने कहा है की , एक ही पिता से अनेक पुत्रों में यदि एक के ही पुत्र है तो वह सभी भाइयों का पुत्र माना जाता है। अनेक पुत्र होते हुए भी , केवल एक ही सब रस्में , श्राद्ध पूरी करेगा। इन दिनों की रस्मों में किसी मन्त्रर का उच्चारण नहीं करना चाहिए।

10 दिनों की रस्में , पुत्र को ही करनी चाहिए । यदि सब से बड़ा पुत्र का मरण हो जाता है तो पिता जो अभी जीवत है , मोह विवश , रस्म को पूरी नहीं कर सकता । 10 दिन के श्राद्ध परिवार के नाम में होते हैं ।

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