अध्याय 3: पाठ भाग 6

यदि महिला बच्चा होने से पहले मर जाए , तो बच्चे को पेट से निकाल कर, ज़मीन पर रख दें और केवल महिला को चिता दें ।

27 मास तक के बच्चे को मिटटी में दबाएँ / यदि इस की मृतु गंगा किनारे होती है तो इसे गंगा में बहा दें।

इन से बड़े बच्चों को चिता देनी चाहिए और अस्थियाँ गंगा में बहा दें/ बच्चों को खाना और एक एक बर्तन पानी का दें.।

पेट में बच्चा मरने से कोई रस्म नहीं ।

शिशु के मरण पर दूध का दान, बच्चे के मरण पर दूध का बर्तन ,मिठाई , खाने की वस्तुएं दें ।

मलिन्शौद्शी के बाद मध्य्म्शौद्शी श्राद्ध - विष्णु और पांच देव श्राद्ध , एकादश को किये जाते हैं । विद्वान ब्रह्मिनों को कुश या चावल के चूरन से ही सांड का निर्माण करके उसका उत्सर्ग करना चाहिए।

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