अध्याय 4: पाठ भाग 2
यदि पिता की सम्पत्ति का बटवारा हो चूका है तो 10 दिन की रस्में , श्राद्ध एक ही पुत्र दुआरा होंगी। परन्तु वार्षिक श्राद्ध सब भाई अलग अलग करें गे ।-पुत्र श्रधा पुर्बक 10 दिनों की रस्मों की पूर्ति में , एक समय भोजन, ज़मीन पर सोना और शुद्ध आचरण रखेगा ।
किसी पवित्र जल स्थान ( कुआँ , तालाब , मन्दिर इत्यादि ) जगह पर स्न्नान , कोई मन्त्र का जाप न करते , करने के बाद , दक्षिण दिशा की ओर मुख करके , किसी वृक्ष के नीचे ,गोबर से पोती हुई जमीन पर,
पूजा योग्य स्थान बना कर , दरबा और कुषा घास से बनी ,मृतक की प्रतिमा बना कर पूजा करे । इस के आगे कुषा घास बिछा कर लाइ ढाल कर , चावल का पक्का खाना ,धुप, फूल ,फल आदि अर्पण करे ।
इसी तरह , 9 दिनों तक करते हुए, 10 वें दिन , पूरी हजामत बनवा कर, पीले वस्त्र धारण कर ," मासा " के लडू और सामग्री के साथ , पूजा करते हुए , मुक्त आत्मा की शांति के लिए प्रेरणा करें । प्रति दिन ,श्राद्ध के बाद, नहा कर , गौ को प्रसाद खिला कर , आप भोजन करे ।
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