अध्याय 3: पाठ भाग 4

दाह क्रिया के बाद , अस्थि -संचयन क्रिया करनी चाहिए । इस के बाद दाह - क्रिया के समय 6 पिंड तथा दशगात्र के अंतर्गत 10 पिंड दान आदि की प्रिक्रिया बताई गई है।

चौथे दिन अस्थि -संचयन करनी चाहिए । यदि कोई रूकावट न हो ,तो दूसरे अथवा तीसरे दिन भी कर सकते हैं ।

शमशान घाट पहुंच कर ,स्नानं करके,गर्म दुशाला ले कर , अनाज का दान ,चिता वाली जगह पर देवी -देवताओं को नमस्कार करके , ३ चक्कर काटते हुए "यामायात्वा " मन्त्रर का उच्चराण करते हुए , दूध का व फिर पानी का छींटे दे कर ,चिता में से अस्थिओं को इकठा करो ।

अस्थिओं को "पालाषा "के पत्तों पर रख कर , दूध और पानी से छिड़क कर , एक मिटटी के बर्तन में रखें । श्राद्ध की रसम पूरी करें ।

एक तिकोने ज़मीन के टुकड़े को गोबर से पोत कर , उत्तर दिशा की ओर मुख करके , 3 लाइ , तीनो दिशाओं में अर्पण करें ।

अस्थियाँ इकठी करने के बाद , एक तीन टांगों वाले स्टूल पर , बिना मूंह ढके , पानी से भरा हुआ एक जार रखें ।

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