अध्याय 3: पाठ भाग 2

इस के बाद चिता का निर्माण करें / लाश को उसपर रखें /मृतक के हाथों में , और चिता पर "लाइ" के दाने रखें । इस प्रकार मृतक को 5 "लाइ" के दाने मिलने से वह घर वालों को परेशान नहीं करता ।

शमशान भूमि में , शूद्रों दुआरा पहुंचाई गई वस्तुओं से वहां किया गया सम्पूर्ण कर्म निष्फल हो जाता है ।

किसी कारण वश उपर्युक्त पिंड न दिए जाने पर , शव राक्षों के भक्षण -योग्य हो जाता है ।

दाह - कार्य में चंडाल के घर की अग्नि , चिता की अग्नि और पापी के घर की अग्नि का प्रयोग नहीं करना चाहिए ।

जब चिता में ,शव का आधा शरीर जल जाय ,उस की खोपरी को किसी लकड़ी के डंडे से भंग करके { ताकि वह पित्तरों की दुनिया में चला जाये },तिल मिश्रित घी अर्पित करे । पुत्र को इस समय भाभुक हो कर रोना चाहिए ,ताकि वह सदा प्रसन्न रहे ।

जब चिता जल कर समाप्त हो जाये ,तो पहले स्त्रिओं को , बाद में पुत्रों को नहा कर , नीम वृक्ष का एक एक पत्ता खाना चाहिए । घर को जाने के समय इस्त्त्रिओन को आगे चलना चाहिए ।

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