अध्याय 3: पाठ भाग 1

दाह -संस्कार ~ पुत्र और पौत्र यदि विधि पूर्वक अंतिम संस्कार करते हैं तो वह पुश्तानी कर्ज़ से मुक्त हो जाते हैं ।

दाह-संस्कार के अंतगर्त छेह पिंड देने की विधि है ।

पहला पिंड - मुख स्थान पर

दूसरा पिंड - दुआर पर

तीसरा पिंड - चौराहे पर

चौथा पिंड - विश्राम स्थान पर

पांचवां पिंड - चिता पर

छटा पिंड - अस्थि -संचयन के समय

शमशान घाट से आधा रास्ता पर रूक कर , लाश को स्वच्छ स्थान पर नेहला कर चारों दिशाओं में पूजा करनी चाहिए । तब इसे शमशान भूमि पर , सर उत्तर दिशा में करके लेटाना चाहिए ।

जलने वाली जगह को साफ़ करके ,गोबर का लेप करें । इस स्थान पर पहले कोई लाश न जली हो ।

कुछ मिटटी बटोर कर उस की मूर्ती बना कर ,पानी से छिडक कर पूजा करके अग्नि की स्थापना करें.।

अग्नि की पूजा रंगदार चावलों से करते हुए अग्नि शक्ति को सम्भोदित करें :" लोमान ,इस संसार से यह प्राणी चला गया है , इस आत्मा को स्वर्ग प्रदान करें "

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