अध्याय 2: पाठ भाग 9

पुष्पों की माला से विभूषत करके , उसे पुत्र , बंधुओं के साथ दुआर से लेजाया जाए । उस समय पुत्र को मरे हुए पिता के शव को कंधे पर रख कर स्वयं ले जाना चाहिए.। यदि मनुष को मोक्ष न मिलता हो , तो पुत्र नर्क से उसका उद्दार कर देता है । जो पुत्र लाश को कन्धा देता है, उसे हर कदम पर अश्व मेघ यघ का फल मिलता है।

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