अध्याय 2: पाठ भाग 8

उस के समीप, तुलसी का पेड़, शालग्राम की शिल्ला ( सभी पापों को नष्ट करती है), भी लाकर रखें । जिस घर में तुलसी स्थल बना कर तुलसी की पूजा होती है वह एक पवित्र नहाने का स्थान माना जाता है और यम के दूत वहां नहीं आते ।

इस के बाद ,यथा विधान सूतकों का पाठ करना चाहिए । ऐसा करने से मृत्यु मुक्ति दायक होती है ।

शोक न मनाते ,पुत्र को सर मुंडवा कर नए वस्त्र्र धारण कर , अपने प्रियजनों के साथ लाश को नहलाना चाहिए।

इस के बाद मरे हुए व्यक्ति के शरीरगत विभिन सथानों में ( मुख, नाक के छिदर ,नेत्र, कान , लिंग, ब्रह्माण्ड ) पर सोने की शालाखें रखें.।

उस के शव को दो वस्त्रों से आच्छादित करके कुंकुम और अक्षत से पूजन करना चाहिए ।

घर की बहुरानी और दूसरों को लाश की गिर्द चक्कर लगा कर उसे पूजन चाहिए और मरण स्थल पर चावल की खील ( लाइ) अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से धरती माता और दिव्य शक्तिंयां प्रस्सन होती हैं ।

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