अध्याय 2: पाठ भाग 6

थोड़ी सम्पत्ति , धन अपने हाथों से दान में दी हुई का प्रभाव सदा ही रहता है। धन, सम्पत्ति , पत्नी, परिवार, सब विनाश होने वाले हैं इस लिए पुण्य कर्मों को संचित करो। पुण्य - दान , छोटे-बड़े से मेरे को कोई फर्क नहीं पड़ता ।

लालच के कारण जो पापी लोग , बीमारीओं में पुण्य - दान नहीं करते, वह सदा दुखी ही रहते हैं.।

पुत्र, पौत्र , भाई, बन्धु , मित्र , जो मरणासन्न व्यक्ति के लिए , दान पुण्य नहीं करते, उन्हें ब्राह्मिन हत्या का पाप लगता है ।

इन बताए गये सभी प्रकार के दानों में प्राणी की श्रद्धा और अश्रद्धा से आई हुई दान की अधिकता और कमी के कारण उस के फल में श्रेष्ठता और लघुता आती है ।

भूमि पर बने इस मंडल में ब्रह्मा ,विष्णु,रूद्र ,लक्ष्मी तथा अग्नि देवता विराजमान हो जाते हैं । अत: मंडल का निर्माण अवश्य करना चाहिए । मंडलवहींन भूमि पर प्राणत्याग करने पर , उसे अन्य योनी नहीं प्राप्त होती.। उस की जीव आत्मा वायु के साथ भटकती रहती है.।

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