अध्याय 15: पाठ भाग 1
मुक्ति पाने के उपचार ~ गरुड़ जी, भगवान् श्री विष्णु जी से पूछते हैं , हे! मुक्ति प्रदान करने वाले सर्व श्रेष्ट, इस संसार में करोड़ों जीव दिन प्रतिदिन ,जन्मते और मरते हैं । इस का कोई अंत नहीं है। इस संसार में सभी दुखी ही नजर आते हैं , सुखी कोई भी नहीं। किन उपायों से यह जीव मुक्ति प्राप्त कर सकतें हैं, आप बताने की कृपया करें।
भगवान् विष्णु जी ने कहा , हे पक्षी राज , मनुष शरीर पा कर ,जो आत्मा की मुक्ति के बारे में नहीं सोचता वह मनुष्य का पाप एक ब्राह्मिन को वध करने से भी बड़ा है। मनुष्य शरीर के बिना कोई भी प्राणी , इस शरीर के महत्त्व को नहीं जान सकता । इस लिए इस शरीर को सुरक्षित रख कर सत्य कर्म करने अनिवार्य है।
धन ,मकान,अच्छे-बुरे कर्म दुबारा से मिल सकते हैं, परन्तु मनुष्य शरीर नहीं । इस शरीर की सुरक्षा , अपने कर्तव्य के लिए, कर्तव्य ज्ञान के लिए और ज्ञान योग- अभिआस के लिए आवश्यक है। यह एक मुक्ति का साधन है। मुर्ख पुरुष के घर में जब आग लग जाती है तो वह कुआँ खोदना शुरू करता है।
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