अध्याय 13: पाठ भाग 2

"धर्म" - मार्ग पर , उत्तम प्रकृति वाले प्राणी चलते हैं।

"अर्थ" - अर्थात धन -धान्य का दान करने वाले प्राणी, विमान से परलोक जाते हैं।

"काम" - जो प्राणी अभिलक्षित याचक की इच्छा को संतुष्ट करते हैं, वह कंधे पर सवार हो कर प्रस्थान करते हैं।

"मोक्ष" - जो प्राणी मोक्ष की आकांक्षा रखते हैं ,वह हंस युक्त विमान से परलोक को जाते हैं ।

राजा बाभ्रुवाहाना की कथा :

त्रेता युग में ,बभ्रुवाहाना नाम के एक बहुत पराक्रमी, तेजस्वी , लोक प्रिय राजा थे । उन के राज में पूरण सम्पनता थी। ब्राह्मिनो का आदर सत्कार, रीती-रिवाज वह पूरी श्रधा के साथ करते थे।

एक दिन वह अपने मंत्रिओं के साथ जंगल में शिकार खेलने गये । एक हिरन पर वार किया। घायल मृग , तीर के साथ जंगल के भीतर भागा। राजा भी उस के खून के निशान के पीछे पीछे , सुनसान जंगल में जा कर खो गया। भूख और प्यास से परेशान राजा एक झील के पास पहुंचा । झील में स्न्नान कर ,ठंडा पानी पी कर , जब वह बाहिर आया ,तो उसने एक खूबसूरत अंजीर का पेड़ देखा। अंजीर के पेड़ की छाया में वह बैठ गया।

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