अध्याय 11: पाठ भाग 3
पत्नी की मृतु पर, यदि पुत्र न हो तो, पति को अपनी सास और सम्बन्धियों के साथ रस्म करनी चाहिए ।
फिर ब्रह्मिनों को भोज , दाद, दक्षिणा, उपहारों और 12 घट जल से परिपूर्ण दान करने चाहिए।
धारण किये वस्त्रों का त्याग करके, एक शय्या दान करे। शय्या बहुत मूल्यवान ,सभी सुख प्रदान करने वाले साधनों से युक्त , छाता, चांदी के लैम्प , इस भगवान् नारायण और लक्ष्मी जी मूर्ती कपड़ों, गैह्नो से सुस्जित, गदा , आदि होनी चाहिए।
स्त्रिओं की रस्म में लाल कपडा , जेवर के साथ अन्य सामग्री होनी चाहिए।
फिर एक ब्रह्मिन को उसकी पत्नी के साथ, शय्या पर ,नारायण-लक्ष्मी जी के सामने बिठा कर , उतर दिशा को मुख करके ,लक्ष्मी-नारायण जी को फूल माला पहना कर पूजा करके,यह उच्चारण करे, "हे नाथ, जिस प्रकार आप की शय्या दूध का सागर है ,यह शय्या भी उसी प्रकार मेरे अगले जन्मों में सुखदाई हो " । ब्राह्मिन और प्रभु को पुष्पांजली देते हुए , ब्राह्मिन को सम्भोदित करके " हे ब्राह्मिन देवता, इस को स्वीकार करें" कह कर शय्या दान करे। उस शय्या पर विराजमान सभी को तीन बार झूला दे । शय्या के चारों ओर चक्कर काट कर सब से विदाई ले ।
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