अध्याय 11: पाठ भाग 2
स्पिन्दा की रस्म अपवित्र दिनों के बाद, बारहवें दिन ,अग्नि के समक्ष या बिना अग्नि के ,पूरण होती है ।
विधि : ~ नहा धो कर, मृतु वाले स्थान को गोबर से पोत कर, स्थापित देवों की मूर्तिओं के चरण धो कर,पित्तरों को "लाइ" अर्पण करके , पुत्र अनच्मन से थोडा जल ग्रहण करे।
3,3 "लाइ" के दाने , वासु देव , रूद्र ,और अर्का को अपने दादा, और उनसे पूर्वज के रूप में , और फिर मृतक को अर्पण करे।
सभी की संदल चटनी, तुलसी पत्ते ,धुप, सुगन्धित वस्तुओं, उपहार आदि से पूजा करे।
मृतक को दिए हुई श्रधान्जली को एक सोने की सलाख से तीन भागों में बाँट कर ,एक,एक भाग , दूसरों में अच्छी प्रकार , मिला लें ।
माता श्री का स्पिन्दा , दादिओं के साथ , और पिता का स्पिन्दा , दादाओं के साथ करना चाहिए।
यदि पिता की मृतु , दादा के जीवत रहते हुए हो जी है , तो ३ लाइ के दाने पढ़ - दादा और उनके पूर्वजों को श्रधान्जली देनी चाहिए।
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