अध्याय 10: पुनर्जन्म का वर्णन

पापों की संज्ञा और पुनर्जन्म

गौ हत्या - कुबड़ा स्त्री हत्या , पेट गिराना - बीमारीओं से लिप्त अवैध सम्बन्ध - हिजड़ा दूसरों को दिए बिना मिठाई खाना - सूजी गर्दन श्राद्ध में अशुद्ध पकवान - फ्लेहरी वेद ,शास्त्रों का विरोध - पीलिया पुस्तक चुराना - अँधा ब्राह्मिन/गौ को पैर मारना - लंगड़ा झूट बोलना - हकलाना जहर देना - पागल खाना चुराना - चूहा सब्जी चुराना - मोर धातु चुराना - गरीबी नमक चुराना - चींटी फल,फूल,पान चुराना - जंगली बंदर जूते,कपास चुराना - भेद / बकरी शिकार करना - कसाई के घर बकरी ज़हर पान करके मृतु - काला नाग बगल में छुरी ,मुंह में राम राम ब्राह्मिन - सारस मित्र को धोका - गीध बिक्री में धोका - उल्लू माता /पिता से झगडा - पेट में ही मर जाना स्त्री जो सास/ सुसर को गाली दे - जोंक पति को बुरा -भला कहना - जू धोके से ब्राह्मिन की संपत्ति ,हडपना -- सात पीढयों तक नुक्सान दी हुई वस्तु को फिर से मुफ्त में वापिस ले लेना -- घोर नर्क में जाना

जो दान - पुन्य आदि नहीं करते, वह गरीबी में जीते हैं । गरीबी में वह पाप कर्म करते हैं ।यह कर्म उन्हें नर्क में ले जाते हैं । फिर गरीब पैदा होते हैं और पाप कर्म करते हैं।

जो भी अच्छे, बुरे कर्म होते हैं , उन्हें भोगना पड़ता है। न भोगे हुए कर्म लाखों वर्ष में भी नष्ट नहीं होते।

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