अध्याय 10: पाठ भाग 2
जो दान - पुन्य आदि नहीं करते, वह गरीबी में जीते हैं । गरीबी में वह पाप कर्म करते हैं ।यह कर्म उन्हें नर्क में ले जाते हैं । फिर गरीब पैदा होते हैं और पाप कर्म करते हैं।
जो भी अच्छे, बुरे कर्म होते हैं , उन्हें भोगना पड़ता है। न भोगे हुए कर्म लाखों वर्ष में भी नष्ट नहीं होते।
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