अध्याय 1: पाठ भाग 6

उस समय जो प्राणी दुखात्मा होते हैं, उन्हें यमदूत अपने पाश्बंधो में जकड़ कर मारते हैं ।

जो अछे कर्मी होते हैं , उन्हें स्वर्ग के पार्षद सुख पूर्वक अपने लोक को ले जाते हैं ।

भीम काया, दुराकृति यम राज के दूतों को देख कर ही पापिओं के मन में भय उत्पन्न हो जाता है । हाहाकार करता हुआ ,अंगूठे के नाप जितना मृत मनुष्य ,अपने घर को देखता हुआ , यमदूतों दुआरा ,घसीटा हुआ , रास्ते में अनेक यातनाएं सहता हुआ , यमराज के सामने ले जाया जाता है।

जीव अत्ति भयानिक यमराज की काया को देखता है और फिर उस के आदेश पर तुरंत वापिस अपने मृत स्थान पर यमदूतों के साथ , आ जाता है । वह वापिस अपने शरीर में जाने की कोशिश करता है ,पर यमदूत उस के गले में फंदा डाले रहते हैं । उसे भूख और प्यास बहूत सताती है और बहूत रोता है.। अपने पुत्रों दुआरा अर्पित की हुयी चावल की खीलों को वह खाता है फिर भी भूख नहीं मिटती ।

जिन आत्माओंको यह खीलें नहीं मिल पातीं ,वह सुनसान जंगल में भटकती रहती हैं ।

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