भाग III – मूलभूत अधिकार (12 – 35)
अनुच्छेद 31C: कुछ निदेशक तत्त्वों को प्रभावी करने वाली विधियों की व्यावृत्ति
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इस अनुच्छेद का अध्ययन यहाँ करेंमूल अधिकार →²[31ग. कुछ निदेशक तत्त्वों को प्रभावी करने वाली विधियों की व्यावृत्ति–अनुच्छेद 13 में किसी बात के होते हुए भी, कोई विधि, जो ³[भाग 4 में अधिकथित सभी या किन्हीं तत्त्वों] को सुनिश्चित करने के लिए राज्य की नीति को प्रभावी करने वाली है, इस आधार पर शून्य नहीं समझी जाएगी कि वह ⁴[अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19] द्वारा प्रदत्त अधिकारों में से किसी से असंगत है या उसे छीनती है या न्यून करती है ⁵[और कोई विधि, जिसमें यह घोषणा है कि वह ऐसी नीति को प्रभावी करने के लिए है, किसी न्यायालय में इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी कि वह ऐसी नीति को प्रभावी नहीं करती है]:
परंतु जहां ऐसी विधि किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई जाती है वहां इस अनुच्छेद के उपबंध उस विधि को तब तक लागू नहीं होंगे जब तक ऐसी विधि को, जो राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखी गई है, उसकी अनुमति प्राप्त नहीं हो गई है ।]
1. उच्चतम न्यायालय ने, केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य ए.आई.आर. 1973 एस.सी. 1461 में इटैलिक में लिखे गए शब्दों को निष्प्रभावी कर दिया है ।
2. संविधान (पच्चीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1971 की धारा 3 द्वारा (20-4-1972 से) अंतःस्थापित।
3. संविधान (बयालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 4 द्वारा (3-1-1977 से) ''अनुच्छेद 39 के खंड (ख) या खंड (ग) में विनिर्दिष्ट सिद्धांतों'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
4. संविधान (चवालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 8 द्वारा (20-6-1979 से) ''अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 19 या अनुच्छेद 31'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
5. उच्चतम न्यायालय ने, मिनर्वा मिल्स लि. और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य ए.आई.आर. 1980 एस.सी. 1789 में अविधिमान्य घोषित कर दिया गया।
आधिकारिक संदर्भ: भारत का संविधान 2024 (अंग्रेज़ी-हिंदी द्विभाषी संस्करण) · लिंक सत्यापित 2026-09-30
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