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धारा 11: तीसरे पक्ष की सूचना

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 · हिंदी समेकित अध्ययन पाठ और सरल व्याख्या। स्वतंत्र शैक्षिक सामग्री, कानूनी सलाह या सरकारी सेवा नहीं।

इस धारा को समझें

धारा लागू होने पर अधिकारी पाँच दिनों में तीसरे पक्ष को सूचना देता है और अभ्यावेदन हेतु दस दिन देता है। प्रकटन का निर्णय चालीस दिनों में होता है। परामर्श का अर्थ तीसरे पक्ष को स्वतः अंतिम निषेधाधिकार देना नहीं है; प्रकटन और अपील की सुरक्षा दोनों पढ़ें।

Banaka की मूल व्याख्या · जाँच: 30 सितंबर 2026 · आधिकारिक हिंदी अनुवाद नहीं।

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हिंदी अधिनियम पाठ

Banaka का संपादकीय समेकित अध्ययन पाठ · 18 नवंबर 2025 के अंग्रेज़ी संस्करण से मिलान। सरल व्याख्या ऊपर अलग दी गई है। मूल अंग्रेज़ी पाठ के लिए ‘Read in English’ खोलें।

11. तीसरे पक्ष की सूचना.

(1) जहां, यथास्थिति, किसी केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी का, इस अधिनियम के अधीन किए गए अनुरोध पर कोई ऐसी सूचना या अभिलेख या उसके किसी भाग को प्रकट करने का आशय है, जो किसी पर व्यक्ति से संबंधित है या उसके द्वारा इसका प्रदाय किया गया है और उस पर व्यक्ति द्वारा उसे गोपनीय माना गया है, वहां, यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी अनुरोध प्राप्त होने से पांच दिन के भीतर ऐसे पर व्यक्ति को अनुरोध की और इस तथ्य की लिखित रूप में सूचना देगा कि, यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी का उक्‍त सूचना या अभिलेख या उसके किसी भाग को प्रकट करने का आशय है, और इस बारे में कि सूचना प्रकट की जानी चाहिए या नहीं, लिखित में या मौखिक रूप से निवेदन करने के लिए पर व्यक्ति को आमंत्रित करेगा तथा सूचना के प्रकटन के बारे में कोई विनिश्चय करते समय पर व्यक्ति के ऐसे निवेदन को ध्यान में रखा जाएगा :

परन्तु विधि द्वारा संरक्षित व्यापार या वाणिज्यिक गुप्त बातों की दशा में के सिवाय, यदि ऐसे प्रकटन में लोकहित, ऐसे पर व्यक्ति के हितों की किसी संभावित अपहानि या क्षति से अधिक महत्वपूर्ण है तो प्रकटन अनुज्ञात किया जा सकेगा।

(2) जहां उपधारा (1) के अधीन, यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी द्वारा पर व्यक्ति पर किसी सूचना या अभिलेख या उसके किसी भाग के बारे में किसी सूचना की तामील की जाती है, वहां ऐसे पर व्यक्ति को, ऐसी सूचना की प्राप्ति की तारीख से दस दिन के भीतर, प्रस्तावित प्रकटन के विरुद्ध अभ्यावेदन करने का अवसर दिया जाएगा।

(3) धारा 7 में किसी बात के होते हुए भी, यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी धारा 6 के अधीन अनुरोध प्राप्त होने के पश्चात् चालीस दिन के भीतर, यदि पर व्यक्ति को उपधारा (2) के अधीन अभ्यावेदन करने का अवसर दे दिया गया है, तो इस बारे में विनिश्चय करेगा कि उक्‍त सूचना या अभिलेख या उसके भाग का प्रकटन किया जाए या नहीं और अपने विनिश्चय की सूचना लिखित में पर व्यक्ति को देगा।

(4) उपधारा (3) के अधीन दी गई सूचना में यह कथन भी सम्मिलित होगा कि वह पर व्यक्ति, जिसे सूचना दी गई है, धारा 19 के अधीन उक्‍त विनिश्चय के विरुद्ध अपील करने का हकदार है।