BNSS धारा 516: कुछ मामलों में समय का बहिष्कार

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 38: कुछ अपराधों का संज्ञान लेने की सीमा

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516. (1) परिसीमा की अवधि की गणना करने में, वह समय जिसके दौरान कोई भी व्यक्ति उचित परिश्रम के साथ अपराधी के खिलाफ किसी अन्य अभियोजन पर मुकदमा चला रहा है, चाहे वह प्रथम दृष्टया न्यायालय में हो या अपील या पुनरीक्षण न्यायालय में, को बाहर रखा जाएगा। :
बशर्ते कि ऐसा कोई बहिष्करण तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि अभियोजन समान तथ्यों से संबंधित न हो और उस न्यायालय में अच्छे विश्वास के साथ मुकदमा चलाया गया हो जो क्षेत्राधिकार के दोष या समान प्रकृति के अन्य कारणों से इस पर विचार करने में असमर्थ है।
(2) जहां किसी अपराध के संबंध में अभियोजन की संस्था को निषेधाज्ञा या आदेश द्वारा रोक दिया गया है, तो परिसीमा की अवधि की गणना करते समय, निषेधाज्ञा या आदेश की निरंतरता की अवधि, जिस दिन इसे जारी किया गया था या बनाया गया है, और जिस दिन इसे वापस लिया गया था, उसे बाहर रखा जाएगा।
(3) जहां किसी अपराध के लिए अभियोजन की सूचना दी गई है, या जहां, किसी भी समय लागू कानून के तहत, किसी अपराध के लिए अभियोजन शुरू करने के लिए सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी की पिछली सहमति या मंजूरी आवश्यक है , फिर, सीमा की अवधि की गणना करते समय, ऐसे नोटिस की अवधि या, जैसा भी मामला हो, ऐसी सहमति या मंजूरी प्राप्त करने के लिए आवश्यक समय को बाहर रखा जाएगा।
स्पष्टीकरण।—सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी की सहमति या मंजूरी प्राप्त करने के लिए आवश्यक समय की गणना करने में, वह तारीख जिस पर सहमति या मंजूरी प्राप्त करने के लिए आवेदन किया गया था और सरकार या अन्य का आदेश प्राप्त होने की तारीख प्राधिकरण दोनों को बाहर रखा जाएगा।
(4) परिसीमा की अवधि की गणना करने में, वह समय जिसके दौरान अपराधी—
(ए) भारत से या भारत के बाहर किसी भी क्षेत्र से अनुपस्थित रहा है जो केंद्र सरकार के प्रशासन के अधीन है; या
(बी) फरार होकर या खुद को छिपाकर गिरफ्तारी से बच गया है, उसे बाहर रखा जाएगा।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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