BNSS धारा 503: संपत्ति की जब्ती पर पुलिस द्वारा प्रक्रिया
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 36: संपत्ति का निपटान
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503. (1) जब भी इस संहिता के प्रावधानों के तहत किसी पुलिस अधिकारी द्वारा संपत्ति की जब्ती की सूचना मजिस्ट्रेट को दी जाती है, और ऐसी संपत्ति किसी जांच या परीक्षण के दौरान आपराधिक न्यायालय के समक्ष पेश नहीं की जाती है, तो मजिस्ट्रेट ऐसा आदेश दे सकता है। ऐसी संपत्ति के निपटान या उसके कब्जे के हकदार व्यक्ति को ऐसी संपत्ति की डिलीवरी के संबंध में उचित समझता है, या यदि ऐसे व्यक्ति को सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है, तो ऐसी संपत्ति की हिरासत और उत्पादन के संबंध में।
(2) यदि ऐसा हकदार व्यक्ति ज्ञात है, तो मजिस्ट्रेट ऐसी शर्तों (यदि कोई हो) पर संपत्ति को उसे सौंपने का आदेश दे सकता है, जैसा कि मजिस्ट्रेट उचित समझे और यदि ऐसा व्यक्ति अज्ञात है, तो मजिस्ट्रेट उसे हिरासत में ले सकता है और, ऐसे मामले में, एक उद्घोषणा जारी करें जिसमें उन वस्तुओं को निर्दिष्ट किया जाए जिनमें ऐसी संपत्ति शामिल है, और किसी भी व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वह उसके सामने पेश हो और ऐसी उद्घोषणा की तारीख से छह महीने के भीतर अपना दावा स्थापित करे।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 497. कुछ मामलों में मुकदमे के लंबित रहने तक संपत्ति की हिरासत और निपटान का आदेश
- 498. मुकदमे के समापन पर संपत्ति के निपटान का आदेश
- 499. आरोपी पर पाए गए पैसे का निर्दोष खरीदार को भुगतान
- 500. धारा 498 या धारा 499 के तहत आदेशों के खिलाफ अपील
- 501. अपमानजनक और अन्य सामग्री का विनाश
- 502. अचल संपत्ति का कब्जा बहाल करने की शक्ति
- 504. प्रक्रिया जहां छह महीने के भीतर कोई दावेदार उपस्थित नहीं होता है
- 505. खराब होने वाली संपत्ति को बेचने की शक्ति