BNSS धारा 498: मुकदमे के समापन पर संपत्ति के निपटान का आदेश

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 36: संपत्ति का निपटान

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498. (1) जब किसी आपराधिक मामले में कोई जांच, पूछताछ या मुकदमा समाप्त हो जाता है, तो न्यायालय या मजिस्ट्रेट निपटान के लिए ऐसा आदेश दे सकता है, जो इसके हकदार होने का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति को नष्ट, जब्ती या वितरण द्वारा उचित समझे। उसके समक्ष या उसकी अभिरक्षा में प्रस्तुत किसी भी संपत्ति या दस्तावेज़ पर कब्ज़ा या अन्यथा, या जिसके संबंध में कोई अपराध किया गया प्रतीत होता है, या जिसका उपयोग किसी अपराध के लिए किया गया है।
(2) किसी भी संपत्ति को उसके कब्जे का हकदार होने का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति को बिना किसी शर्त के या इस शर्त पर कि वह प्रतिभूतियों के साथ या उसके बिना, एक बांड निष्पादित करता है, को किसी भी संपत्ति की डिलीवरी के लिए उप-धारा (1) के तहत एक आदेश दिया जा सकता है। न्यायालय या मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के लिए, यदि उप-धारा (1) के तहत दिए गए आदेश को संशोधित किया जाता है या अपील या पुनरीक्षण पर रद्द कर दिया जाता है, तो ऐसी संपत्ति को न्यायालय में बहाल करने के लिए संलग्न किया जाता है।
(3) सत्र न्यायालय, उप-धारा (1) के तहत स्वयं आदेश देने के बजाय, संपत्ति को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को सौंपने का निर्देश दे सकता है, जो इसके बाद धारा 503, 504 में प्रदान किए गए तरीके से इससे निपटेगा। और 505.
(4) सिवाय इसके कि जहां संपत्ति पशुधन है या शीघ्र और प्राकृतिक क्षय के अधीन है, या जहां उप-धारा (2) के अनुसरण में एक बांड निष्पादित किया गया है, उप-धारा (1) के तहत किए गए आदेश का पालन नहीं किया जाएगा। दो महीने के लिए, या जब कोई अपील प्रस्तुत की जाती है, जब तक कि ऐसी अपील का निपटारा नहीं हो जाता।
(5) इस खंड में, शब्द "संपत्ति" ऐसी संपत्ति के मामले में, जिसके संबंध में कोई अपराध किया गया प्रतीत होता है, इसमें न केवल ऐसी संपत्ति शामिल है जो मूल रूप से किसी भी पक्ष के कब्जे में या नियंत्रण में है, बल्कि ऐसी संपत्ति भी है जिसमें या जिसके लिए उसे परिवर्तित किया गया हो। या विनिमय किया गया, और ऐसे रूपांतरण या विनिमय द्वारा प्राप्त की गई कोई भी चीज़, चाहे तुरंत या अन्यथा।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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