BNSS धारा 439: जांच का आदेश देने की शक्ति
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 32: संदर्भ और संशोधन
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439. धारा 438 के तहत या अन्यथा किसी भी रिकॉर्ड की जांच करने पर, उच्च न्यायालय या सत्र न्यायाधीश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को स्वयं या अपने अधीनस्थ किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा ऐसा करने का निर्देश दे सकते हैं, और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट स्वयं किसी रिकॉर्ड को बनाने या निर्देशित कर सकता है। अधीनस्थ मजिस्ट्रेट किसी भी शिकायत की, जिसे धारा 226 या धारा 227 की उप-धारा (4) के तहत खारिज कर दिया गया हो, या किसी अपराध के आरोपी व्यक्ति के मामले में, जिसे बरी कर दिया गया हो, आगे की जांच करेगा:
बशर्ते कि कोई भी न्यायालय इस धारा के तहत किसी ऐसे व्यक्ति के मामले की जांच के लिए कोई निर्देश नहीं देगा, जिसे बरी कर दिया गया हो, जब तक कि ऐसे व्यक्ति को यह कारण बताने का अवसर न मिला हो कि ऐसा निर्देश क्यों नहीं दिया जाना चाहिए।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 436. उच्च न्यायालय का संदर्भ
- 437. उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार मामले का निपटान
- 438. पुनरीक्षण की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए रिकॉर्ड मंगाना
- 440. सत्र न्यायाधीश की पुनरीक्षण की शक्तियां
- 441. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की शक्ति
- 442. उच्च न्यायालय की पुनरीक्षण की शक्तियां
- 443. पुनरीक्षण मामलों को वापस लेने या स्थानांतरित करने की उच्च न्यायालय की शक्ति
- 444. पक्षों को सुनने के लिए न्यायालय का विकल्प
- 445. उच्च न्यायालय के आदेश को निचली अदालत में प्रमाणित किया जाना